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शहर नहीं, चमकेंगी रेलवे की सड़कें

Bhaskar news | Aug 31, 2012, 06:37AM IST
शहर नहीं, चमकेंगी रेलवे की सड़कें
बिलासपुर। शहर की जर्जर सड़कों से परेशान जनता को रेलवे के इलाके में चौड़ी, चमचमाती सड़कों की सुविधा मिलेगी। रेल प्रशासन ने उन सभी सड़कों के कायाकल्प करने की योजना बनाई है, जो रेलवे स्टेशन को जोड़ती हैं। इसके अलावा शहर के लोगों को हैवी ट्रैफिक से निजात दिलाने के लिए गुड्स शेड से व्यापार विहार के लिए एक नई सड़क भी बनाई जाएगी। इन कार्यो पर रेल प्रशासन 6 करोड़ रुपए खर्च करेगा।


बिलासपुर रेलवे स्टेशन को जोड़ने वाली सड़कें नगर निगम और लोक निर्माण विभाग की सड़कों से बेहतर हैं, लेकिन स्टेशन आने-जाने वालों की बढ़ती संख्या के अनुपात में रेलवे की आंतरिक सड़कें सकरी साबित होने लगी हैं। इसके अलावा इंडियन ऑयल डिपो के चलते आसपास की सड़कें गड्ढों में तब्दील हो गई हैं। रेल प्रशासन ने इसे ध्यान में रखते हुए सड़कों का जीर्णोद्धार करने की योजना बनाई है। तारबाहर, चुचुहियापारा, गुड्स शेड, लोको कालोनी सहित आसपास की सड़कों को टुकड़ों में सुधारा जाएगा। इन सब सड़कों को जोड़ा जाए तो बनने वाली सड़कों की लंबाई तकरीबन 6 किलोमीटर होगी, जिस पर रेल प्रशासन ६ करोड़ रुपए खर्च करेगा। सड़कों का निर्माण बरसात के बाद शुरू हो जाए, इसके लिए टेंडर की प्रक्रिया शुरू हो गई है। अगले दो महीने में निर्माण शुरू होगा और 7 महीने के भीतर काम पूरा कर लिया जाएगा।
लोगों की समस्याओं की ओर ध्यान अब तक यही देखा गया है कि रेलवे सड़कों को सुधारती तो थी, लेकिन चौड़ीकरण या फिर नए सिरे से निर्माण पर विचार भी नहीं करती थी। डीआरएम एलसी त्रिवेदी ने पदभार ग्रहण करने के बाद ही स्पष्ट कर दिया था कि उनकी प्राथमिकता आम लोगों की जरूरतें होंगी। डीआरएम ने रेलवे परिक्षेत्र के दौरे में सड़कों की दशा सुधारने के लिए कार्ययोजना बनाने के निर्देश इंजीनियरिंग विभाग को दिए थे।

इंजीनियरिंग विभाग की कार्ययोजना को बिना किसी देर के मंजूरी मिल गई, जिसका परिणाम आने वाले समय में चमचमाती सड़क के रूप में मिलेगा।

हैवी गाड़ियों के लिए नई सड़क
रेलवे की गुड्स साइडिंग में लोडिंग-अनलोडिंग के लिए भारी वाहनों की आवाजाही दिनभर बनी रहती है। सभी भारी वाहन व्यापार विहार, एफसीआई गोदाम होते हुए गुड्स साइडिंग तक पहुंचते हैं। व्यापार विहार में यातायात का ऐसे ही भारी दबाव है, उस पर इन वाहनों की आवाजाही से जाम की स्थिति रहती है। इसे ध्यान में रखते हुए डीआरएम ने गुड्स डिपो से एक किलोमीटर लंबी नई सड़क के निर्माण को मंजूरी दी है। यह सड़क गुड्स डिपो के आगे रेलवे क्षेत्र से होते हुए त्रिवेणी भवन के आगे राज्य सरकार की सड़क से जुड़ जाएंगी। इसका फायदा यह होगा कि गुड्स शेड से आने-जाने वाले भारी वाहनों की आवाजाही व्यापार विहार से बंद हो जाएगी।


रोजगार के लिए भटक रहे मकान मालिक
व्यापार विहार की रोड को सीधी कर रेलवे स्टेशन से जोड़ने के लिए जिन मकानों का अधिग्रहण जिला प्रशासन ने किया है। उनके मालिकों को मुआवजा तो मिला, लेकिन वे अभी भी रोजगार को तरस रहे हैं। बार-बार जिला प्रशासन के अफसरों के दरवाजों पर दस्तक देने के बाद भी उनके हाथ अब तक मायूसी ही लगी है। व्यापार विहार मुख्य सड़क को रेलवे स्टेशन मुख्य मार्ग से जोड़ने के लिए 6 साल पहले नगर निगम ने योजना बनाई और उसे मूर्त रूप देने का निर्णय लेकर कार्रवाई भी शुरू कर दी। 7-8 महीने पहले व्यापार विहार से तारबाहर तिराहे के पास के कुछ मकानों का अधिग्रहण जिला प्रशासन ने किया।
जिन मकानों का अधिग्रहण किया गया उनमें से निरंजन मसीह का पूरा मकान ही सड़क के लिए ले लिया गया है। इस पक्के मकान में सामने की ओर 5 दुकानें थीं, जिन पर श्री मसीह के बेटे व्यवसाय कर रहे थे। इसमें मेडिकल स्टोर्स, साइकिल स्टोर, सेलून एवं चिकन सेंटर था। इसके अलावा अशोक विठोबाजी की तीन दुकानें थीं, जिनमें से एक में मोबाइल फोन व दो में किराना स्टोर था। मकान के एवज में सभी को मुआवजा दे दिया गया, लेकिन व्यवसाय छिन जाने के एवज में बेरोजगारों को कुछ नहीं मिला। जो लोग इन दुकानों में व्यवसाय कर रहे थे, उनमें से सभी की उम्र 45 वर्ष से पार हो चुकी है। अब उनके सामने आय का जरिया सिर्फ व्यवसाय ही है। मुआवजा लेने से पहले प्रार्थियों ने कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त, अपर कलेक्टर व तहसीलदार को आवेदन देकर दुकानों के एवज में व्यवसाय करने के लिए दुकानों की मांग की थी। उन्हें जिला प्रशासन ने आश्वस्त किया था कि शहर में कहीं भी उन्हें दुकानें दी जाएंगी, लेकिन अब तक दुकानें नहीं दी गई हैं। सभी लोगों ने पुन: जिला प्रशासन के अफसरों से मुलाकात कर दुकानें देने की मांग की है ताकि वे नए सिरे से व्यवसाय शुरू कर सकें। नगर निगम ने अधिग्रहित जमीन पर सड़क बनाने का काम शुरू कर दिया है। प्रभावित परिवार के लोगों का कहना है कि उनकी सुनने वाला कोई नहीं है।


॥रेलवे स्टेशन को जोड़ने वाली सड़कों को जरूरत के हिसाब से बनाने के लिए कार्ययोजना तैयार की गई है। इस बात का भी ध्यान रखा गया है कि गुड्स साइडिंग में आने वाले भारी वाहनों की आवाजाही व्यस्त मार्ग से न हो। तमाम सड़कों के सुधार के लिए इंजीनियरिंग विभाग को सात महीने का समय दिया गया है। ञ्जञ्ज
एलसी त्रिवेदी, डीआरएम बिलासपुर

ऐसे आकार लेंगी सड़कें


1 तारबाहर से रेलवे स्टेशन: तारबाहर फाटक से रेलवे स्टेशन जाने वाली सड़क शिव मंदिर के आगे से 500 मीटर तक सकरी है। इसके आगे की सड़क चौड़ी है और गिरजा चौक होते हुए आसानी से रेलवे स्टेशन जाया जा सकता है। रेल प्रशासन इसी सकरी सड़क की चौड़ाई बढ़ाने के साथ ही इसका नए सिरे से निर्माण भी करेगा।
2 तारबाहर से व्यापार विहार: तारबाहर फाटक से व्यापार विहार जाने वाली सड़क चौड़ी तो है, लेकिन गड्ढों में तब्दील हो गई है। ऑयल डिपो में आने वाली टैंकरों के खड़े रहने से आम राहगीरों को भारी परेशानी होती है। रेल प्रशासन इस 700 मीटर लंबी सड़क का नए सिरे से निर्माण कराएगा।
3 तारबाहर से सिरगिट्टी: तारबाहर फाटक से सिरगिट्टी जाने वाले मार्ग में रेलवे का हिस्सा तकरीबन 700 मीटर है। इस सड़क को भी नए सिरे से बनाया जाएगा।
4 चुचुहियापारा से स्टेशन: चुचुहियापारा फाटक से रेलवे स्टेशन जाने वाली सड़क चौड़ी तो है, लेकिन डामरयुक्त सड़क की चौड़ाई काफी कम है। नए फुट ओवरब्रिज के निर्माण से इस मार्ग पर आने-जाने वालों की संख्या बढ़ी है, लिहाजा चौड़ाई बढ़ाकर निर्माण कराया जाएगा।
5 चुचुहियापारा से लोको कालोनी: चुचुहियापारा फाटक के उस पार की सड़क जर्जर स्थिति में है। रेलवे कर्मचारियों का एक बड़ा कुनबा फाटक के उस तरफ निवासरत है, लिहाजा फाटक से लोको कालोनी जाने वाली सड़क की चौड़ाई बढ़ाई जाएगी और नए सिरे से निर्माण होगा।
6 कोचिंग डिपो की सड़क: ऑयल डिपो के बगल से कोचिंग डिपो और गुड्स साइडिंग जाने वाली सड़क जर्जर हो चुकी है। बदहाल सड़क के चलते गुड्स साइडिंग से
माल ढुलाई में परेशानी आती है। समस्या उन 500 से ज्यादा कर्मचारियों की भी है, जो गुड्स साइडिंग और कोचिंग डिपो में कार्यरत हैं। इस सड़क का भी निर्माण कराया जाएगा।
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