बिलासपुर। पोलियो की वजह से दोनों पैर किसी काम के नहीं है। चल नहीं सकती, इसके लिए लोहे के दो भारी-भरकम स्टैंड का सहारा लेना पड़ता है। इसके सहारे भी सीढ़ियों या किसी ऊंची जगह पर चढ़ना बेहद मुश्किल। ऐसे में अनुराधा अग्रवाल ने आईएएस अफसर बनने को अपनी जिंदगी का लक्ष्य तय किया है।
अनुराधा बताती है कि एक साल की उम्र तक सामान्य बच्चों की तरह थी। बाकायदा पोलियो की दवा भी पिलाई गई और टीका भी लगवाया गया था। लेकिन दो दिन के बुखार के बाद शरीर का निचला हिस्स बेकाम हो गया। सातवीं कक्षा तक दोनों हाथों और पैरों और इसके बाद लोहे के स्टैंड के सहारे चलना शुरू किया जो आजतक जारी है।
अनुराधा बताती है कि उसके परिवार ने कभी भी लाचारगी महसूस नहीं होने दी। पापा कहा करते थे कुछ बन जाएगी तो जीवन में दूसरों का सहारा नहीं लेना पड़ेगा। बचपन में हेलेन किलर की कहानी पढ़ी थी, जो हमेशा प्रेरित करती रही। स्कूल और कालेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद बिलासपुर में रहकर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी शुरू की। यहां काफी मुश्किलें आईं। रहने के लिए घर बड़ी मुश्किल से मिला। फिर क्लास तक आने-जाने में होने वाली परेशानियां, लेकिन तय किया था कि हर हाल में तैयारी करनी है।
पीएससी प्री पास करने के बाद फिलहाल सहायक सांख्यिकी अधिकारी के तौर पर जांजगीर में काम कर रहीं अनुराधा का सपना आईएएस अफसर बनना है। मार्गदर्शक सुनील टुटेजा मानते हैं कि अनुराधा निश्चित रूप से इस सपने को पूरा करेगी।
हमेशा खुश देखा
अनुराधा को करीब से जानने वाले लोग बताते हैं कि उन्होंने इस लड़की को हमेशा खुश देखा है। चलते-चलते गिरने के बाद भी उठकर हंसने के उसके आदत से सभी वाकिफ हैं। सुनील बताते हैं कि वे दो साल से उसे पढ़ा रहे हैं, लेकिन कभी भी उसे निराश या दुखी नहीं देखा।
मिल गया जीवनसाथी
परिवार के लोग परेशान रहा करते थे कि अनुराधा से शादी कौन करेगा। पेशे से व्यवसायी दिनेश अग्रवाल ने अनुराधा का खुशमिजाज व्यवहार और चुनौतियों के बाद भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के जज्बे को देखते हुए उससे विवाह करने का फैसला किया। आज उनके विवाह को 6 माह हो चुके हैं।