भाजयुमो भ्रष्टाचार को लेकर केंद्र के खिलाफ छेड़ेगी जंग

रायपुर.भाजयुमो की प्रदेश कार्यसमिति में कोल ब्लाक के भ्रष्टाचार का मुद्दा भी गूंजा। राजनीतिक प्रस्ताव में केंद्र सरकार के भ्रष्टाचार व महंगाई की निंदा करते हुए प्रदेश भर में उसके खिलाफ आंदोलन छेड़ने व तीसरी बार भाजपा की सरकार बनाने का संकल्प लिया गया।
पार्टी के नेताओं ने भाजयुमो कार्यकर्ताओं से व्यक्तिगत स्वार्थ व महत्वाकांक्षा को ताक पर रखने की हिदायत दी। पार्टी उनके अधिकारों की चिंता कर रही है। एकात्म परिसर में कार्यसमिति की बैठक में राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री सौदान सिंह, प्रदेश संगठन महामंत्री राजेश मूणत व प्रदेश प्रभारी संजय श्रीवास्तव भी शामिल हुए।
श्री रामप्रताप ने पदाधिकारियों से दो टूक कहा कि वे व्यक्तिगत स्वार्थ छोड़ें। पार्टी से उन्हें क्या मिला है ये न सोचें। कार्यकर्ताओं के अधिकारों के लिए पार्टी नजर रख रही है। इसलिए अपनी महत्वाकांक्षाओं को छोड़कर पार्टी के प्रति समर्पित रहें। मान-सम्मान के पीछे न दौड़ें, क्योंकि यह ऐसी परछाई है जिसके जितने नजदीक जाओगे वह दो फुट दूर होती जाएगी।
श्री रामप्रताप ने काम के प्रति ईमानदार, आदर्श चरित्र, पार्टी के प्रति समर्पण और इंसानियत रखने के टिप्स दिए। श्री सौदान ने समापन सत्र में मोर्चे की गति व लक्ष्य की सराहना की। उन्होंने उम्मीद जताई कि 2013 में मोर्चे के दम पर राज्य में फिर भाजपा सरकार बनेगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए कि हास्टल व बूथ स्तर पर लोगों के संपर्क में रहें।
मंत्री श्री मूणत ने मोर्चे को अपनी शक्ति व 2013 के लक्ष्य के अनुरूप काम करने को कहा। उन्होंने कोल ब्लाक आबंटन पर कटाक्ष किया कि दो घंटे में केंद्र सरकार ने केंद्रीय मंत्री प्रकाश जायसवाल के रिश्तेदारों को खदानें बांट दीं। उन्होंने सभी कोल ब्लाक के आबंटन को निरस्त करने की मांग करते हुए कहा कि राज्य सरकारों पर आरोप लगाने से पहले केंद्र को सोचना चाहिए कि खदानें देने का अधिकार तो उसे ही है।
9 साल में रमन सरकार ने जितना काम किया है उतना आजादी के बाद किसी सरकार ने नहीं किया। प्रदेश अध्यक्ष अनुराग सिंहदेव व संजय श्रीवास्तव ने भी संबोधन दिया। मोर्चा नवंबर में 10 हजार कार्यकर्ताओं का सम्मेलन करेगा। कार्यकर्ता तीन दिन के अधिवेशन में शिरकत करेंगे। बैठक में पारित राजनीतिक प्रस्ताव में राज्य की कल्याणकारी योजनाओं की तारीफ की गई।
वहीं केंद्र सरकार की नीतियों, भ्रष्टाचार, घोटालों, महंगाई और असम दंगों की घोर निंदा की गई। यूपीए -2 को अब तक सबसे भ्रष्ट सरकार करार देकर उसे लचर व निकम्मी भी बताया। उपाध्यक्ष सतीश लाटिया ने प्रस्ताव पेश किया और समर्थन नवीन मारकंडेय ने किया। पदाधिकारियों ने भी हाथ उठाकर समर्थन किया।








