रायपुर/जगदलपुर। बस्तर के शिल्पकारों की बनाई गई कलाकृतियों की प्रदेश के साथ ही निकटवर्ती राज्यों में काफी मांग है। बावजूद इसके संभाग मुख्यालय में अब तक एक भी शो-रूम स्थापित नहीं किया जा सका है, जबकि इंडस्ट्रियल एरिया स्थित बांस कला केंद्र को मिलने वाला लक्ष्य हर वर्ष पूरा हो रहा है। जिससे विभाग को लाखों रुपए की आय हो रही है।
ज्ञात हो कि बस्तर में ऐसे कई शिल्पकला हैं। जिसकी विदेशों में काफी मांग है। हालांकि विभाग इसके संरक्षण व बढ़ावा देने के लिए योजनाएं तो बनाता है, लेकिन इसका लाभ शिल्पियों को नहीं मिल पा रहा है। जिसके चलते शिल्पी अब इन कलाओं से दूर होते जा रहे है।
बिना किसी रोक-टोक के करते हैं काम :बांस कला केंद्र में यहां फिलहाल 30 महिलाएं बिना किसी रोक-टोक के रोजाना काम पर आती हैं। इन्हें इनकी मेहनत के आधार पर पारिश्रमिक दिया जाता है।
महिलाएं अपने घर का कामकाज निपटाने के बाद यहां आती हैं। किसी तरह की पाबंदी नहीं होने के चलते यहां आने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ती जा रही है। 15 वर्षो से यहां आकर कार्य कर रही मीरा सरकार कहती हैं कि घर में खाली बैठने से अच्छा है यहां आकर थोड़ा काम करने से पैसे भी मिल जाते हैं और मन भी लगा रहता है। समय-समय पर यहां के अधिकारी राज्य व राष्ट्रीय स्तर की होने वाली प्रदर्शनी में शामिल होने भी भेजते हैं। हमें यहां आकर अपनी दिखाना होता है, कच्चा माल से लेकर अन्य उपयोगी सामग्री सभी यही से उपलब्ध हो जाता है।
केंद्र पहुंचकर भी लोग यहां बनने वाले सामान की खरीदी करते है, लेकिन डिस्प्ले करने के लिए व्यवस्था नहीं होने के चलते दिक्कत होती है। संचालनालय से मिलने वाले लक्ष्य की प्राप्ति पिछले तीन सालों से सौ फीसदी हो रही है।
उमेश गायकवाड़, केंद्र प्रबंधक
कहां-कहां गए इस साल
इस साल बांस कला केंद्र को 8 लाख रुपए के उत्पाद बनाने व बेचने का लक्ष्य मिला है। उत्पाद तैयार होने के बाद इसकी बिक्री के लिए हैदराबाद, विशाखापटनम, नागपुर, रायपुर, अहमदाबाद में प्रदर्शनी लगाई जा चुकी है। यहां शो-रूम खुलने से बिक्री और बढ़ सकती है, हालांकि जानकार लोग सीधे केंद्र पहुंचकर माल खरीद लेते हैं। वहीं कुछ आर्डर देकर स्पेशल भी बनवाते हैं। पिछले दो साल तक केंद्र को 5 लाख रुपए तक बिक्री करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। जो दोनों ही साल पूरा किया गया।