घर तोड़कर घुसे हाथियों ने घेर लिया इस बच्ची को लेकिन तभी हुई दिल छूने वाली घटना

जशपुरनगर।ममता कितना अपनापन, कितना गहरा और कितना खूबसूरत शब्द है। समूची पृथ्वी पर बस यही एक पावन रिश्ता है। मनुष्य हो या फिर जानवर ममता का सागर सब में छलछलाता। मौत को करीब देख पूरा परिवार जान बचाने भाग गए, लेकिन डेढ़ वर्षीय बच्ची छूआ गई। उसे गजराज ने छुआ ही नहीं मजे से अपना पेट भर धान खाया और चला गया। यह कहानी ममता का जीता जागता उदाहरण है।
घटना पत्थलगांव से 7 किलोमीटर दूर तिलडेगा की है। पत्थलगांव क्षेत्र में हाथियों का दल बीते कई दिनों से उत्पात मचा रहा है। शुक्रवार की सुबह करीब 4 बजे तिलडेगा में हाथियों का दल घुस आया। हाथियों ने वहां ग्रामीण सहदेव के घर को तोड़ना शुरू किया। आवाज सुनकर सहदेव ने जब बाहर देखा तो, हाथियों को देखकर उसके होश उड़ गए। वह पत्नी रामावती व 4 वर्ष की पुत्री ममता को लेकर बाहर भागा। आपाधापी में उसकी डेढ़ वर्षीय बेटी कांता घर में ही छूट गई। पर अब कुछ नहीं हो सकता था। घर के चारों ओर हाथी थे। डर से सहदेव अपनी मासूम बच्ची को लेने नहीं जा सकता था। उसने भगवान को याद करते हुए सब कुछ ऊपर वाले के हाथ में छोड़ दिया। हाथी ने घर के एक हिस्से की दीवार को तोड़ दिया। इसके बाद हाथी घर में रखे अनाज को चट कर गए। इस दौरान मासूम कांता वहीं पड़ी रही। हाथियों ने उसे छुआ तक नहीं। इधर, हाथियों के आने की खबर सुनकर ग्रामीण एकत्र हो गए। शोर मचाते हुए ग्रामीणों ने हाथियों को जंगल की ओर खदेड़ा। हाथियों के जाने के बाद सहदेव बदहवास घर की ओर भागा। घर में जब उसे बेटी सकुशल दिखी तो, उसने राहत की सांस ली और ईश्वर को धन्यवाद दिया। हाथियों का दल अभी भी तिलडेगा जंगल में डेरा जमाए है। ग्रामीणों के मुताबिक दल में करीब 11-12 हाथी हैं।
मासूम को क्या मालूम की यह मौत है?
परिवार को जान के लाले पड़े थे। बच्ची घर में अकेली चारो तरफ हाथियों से घिरी हुई थी। हाथी अपना पेट भर रहे थे। डेढ़ वर्ष की अबोध कांता को तो यह भी मालूम नहीं कि यह हाथी है और जिले के हाथी जब किसी व्यक्ति के सामने आ जाए तो उसे जिंदा छोड़ते नहीं। पर यह बात आज की घटना से बौना साबित हो गई। कहा जाता है कि हाथी मनुष्य के बाद सबसे समझदार प्राणी है। शायद हाथियों को भी यह ज्ञान हो गया कि यह तो मासूम है।








