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केंद्र सरकार बना रही कोल इंडिया के पुनर्गठन की योजना
मनोज शर्मा | Oct 09, 2012, 03:07AM IST

देश की बढ़ती जरूरतों के कारण सरकार कोयला खनन क्षेत्र में सुधार करने की कोशिशों में है। कोल इंडिया का एक तरह से इस क्षेत्र में एकाधिकार है। सरकार इसे खत्म कर प्रतिस्पर्धात्मक बनाना चाहती है। इसलिए प्रधानमंत्री कार्यालय इस पक्ष में है कि कोल इंडिया का पुनर्गठन किया जाए। इसको लेकर जल्द ही कोयला, ऊर्जा, खान व पर्यावरण मंत्रालय की बैठक होनी है।
पीएम की आर्थिक सलाहकार परिषद भी पक्ष में कुछ समय पहले प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य एम गोविंद राव ने कहा था कि यदि कोल इंडिया आवश्यकता के अनुरूप सालाना कोयला उत्पादन में 7 से 8 फीसदी की कार्ययोजना पर अमल नहीं करती है तो उसका एकाधिकार खत्म किया जाना चाहिए। इसके लिए दो-तीन कोयला कंपनियों की स्थापना करनी चाहिए, ताकि उनमें उचित प्रतिस्पर्धा पनप सके।
उत्पादन बढ़ाने की चुनौती है बड़ी वजह कोल इंडिया का वर्ष 2011-12 में उत्पादन 443 मिलियन टन था। वर्ष 2012-13 के लिए लक्ष्य 470 मिलियन टन रखा गया है। 2011-12 में मांग के अनुसार आपूर्ति कम होने के कारण सरकार को 80 मिलियन टन कोयला आयात करना पड़ा। एक पूर्व अधिकारी कहते हैं कि मांग व आपूर्ति की खाई तेजी से बढ़ती जा रही है। इसके लिए कोल इंडिया को उत्पादन सालाना 8 से 9 फीसदी की दर से बढ़ानी की चुनौती है। यदि एसईसीएल व एमसीएल को स्वतंत्र कंपनी बना दिया जाता है तब इनके कोयला क्षेत्र के विस्तार की गति और तेज होगी।
कोल इंडिया का खदानों पर एक तरह से एकाधिकार है। दो कंपनियां स्वतंत्र बन जाएगी तो वह स्वतंत्र रूप से विस्तार समेत अन्य निर्णय ले सकेगी। उसे कोल इंडिया पर निर्भर नहीं रहना होगा। इससे प्रतिस्पर्धा आएगी। उत्पादन बढ़ेगा। इसका फायदा संबंधित राज्य को भी मिलेगा। उसे रायल्टी के अलावा कंपनी के लाभांश का हिस्सा भी मिल सकेगा।







