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भास्कर दृष्टिकोण: छत्तीसगढ़ का बजट या... चुनावी चावल

आनंद पांडे | Feb 24, 2013, 06:29AM IST
सर्वोच्च प्राथमिकता चुनाव जीतना है। डॉ. रमन सिंह के बजट का एक लाइन का लब्बोलुआब यही है। शायद यही वजह है कि बजट में अर्थनीति पर राजनीति हावी दिखाई पड़ रही है। हर वर्ग को साधने की कोशिश की गई है। चार साल पहले चुनावी घोषणा पत्र में धान पर जो बोनस देने का वादा किया गया था उसे चुनावी साल में निभाना, महज इत्तेफाक नहीं हो सकता।
 
ऐसा क्यों किया जा रहा है इसका राजनैतिक जवाब भले ही तलाश लिया गया हो (केंद्र पर तोहमत लगाकर) लेकिन कोई तार्किक जवाब शायद ही मुख्यमंत्री के पास हो। ऐसा करके सरकार ने कांग्रेस से एक बड़ा चुनावी मुद्दा भी छीन लिया है। कांग्रेस इसे तीन साल से मुद्दा बनाए हुई थी।
 
एससी, एसटी और ओबीसी बच्चों की स्कॉलरशिप को दोगुना करके और बेरोजगारी भत्ता पांच सौ से हजार रुपए करके युवा वोटर को थामने की कोशिश की गई है।
 
स्व-सहायता समूह से जुड़ी प्रदेश की लाखों महिलाओं को भी सस्ता लोन मुहैया करवाकर, मितानिनों के लिए पेंशन योजना लागू करके और आंगनबाड़ी से जुड़ी हजारों महिलाओं को ज्यादा पैसा देकर भी मुस्कुराने का मौका दिया गया है। जाहिर है डॉं. रमन सिंह जानते हैं कि कुर्सी का रास्ता प्रदेश की आधी आबादी का विश्वास जीते बिना तय नहीं किया जा सकता है।
 
एक बत्ती कनेक्शन वालों को दस यूनिट और ज्यादा मुफ्त बिजली देकर भी वोट बैंक पर ही निशाना साधा गया है। हां, आदिवासियों के लिए अलग से बहुत कुछ खास नहीं किया गया है। आने वाले वक्त में (जबकि बस्तर जैसे आदिवासी इलाके की 12 में से 11 सीटें बीजेपी के पास हैं) कांग्रेस इसे चुनावी मुद्दा बना ले तो अचरज नहीं होना चाहिए।
 
पेट्रोल और डीजल पर वेट कम न करने के भी अपने राजनैतिक निहितार्थ हैं। केंद्र की कांग्रेस सरकार के खिलाफ इस वजह से जो नाराजगी है उसे अपना खजाना खाली करके क्यों कम किया जाए?  
 
ज्यादातर योजनाओं में मध्यप्रदेश के नक्शेकदम पर चलने वाली रमन सरकार अगर महिला सुरक्षा के मुद्दे पर भी वहां की सरकार जैसी ही पहल करती तो और भी बेहतर होता।
 
सुरक्षा शिक्षा,कृषि,सड़क, स्वास्थ्य या उद्योग जैसे क्षेत्र में जो भी किया गया है वो हर साल होता है। उसमें कुछ भी बेहद विशेष या सरकार की पीठ थपथपाने लायक नहीं है,वो सब हर साल की बजट पेश करने की सरकारी परंपरा का हिस्सा है। जिसमें तात्कालिक लाभ (चुनाव) पर ज्यादा फोकस है।
 
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