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मुख्यमंत्री ने बुलाई बैठक सतर्क रहने के निर्देश
भास्कर न्यूज
| Jan 19, 2013, 07:00AM IST

रायपुर। सुकमा जिले में सेना के हेलिकाप्टर पर नक्सलियों द्वारा की गई फायरिंग की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने रात को अपने निवास पर प्रमुख अफसरों की बैठक बुलाई। उन्होंने पुलिस के अफसरों से कहा है कि भविष्य में इस तरह के मामलों में जवानों को पूरी सतर्कता के साथ काम करने के लिए कहा जाए।
डीजीपी रामनिवास और मुकेश गुप्ता ने पूरी घटना की जानकारी मुख्यमंत्री को दी। इस दौरान मुख्य सचिव सुनील कुमार, प्रमुख सचिव गृह एनके असवाल और अन्य अधिकारी मौजूद थे। फायरिंग की निंदा करते हुए मुख्यमंत्री ने शहीद जवान के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हेलिकाप्टर का सुरक्षित उतरना हम सबके लिए राहत की बात है लेकिन हमें अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है। वैसे राज्य की ओर से केंद्रीय गृह मंत्रालय को भी घटना की जानकारी दे दी गई है।
लगातार कर रहे हैं हमला
सुकमा जिले के धुर नक्सली इलाके तेमेलवाड़ा के पास हुआ यह हमला पहला नहीं है। बस्तर इलाके में नक्सली लगातार वायुसेना और पुलिस के हेलिकॉप्टरों को निशाना बनाने की कोशिश करते रहे हैं। अकेले छत्तीसगढ़ में ही पिछले पांच सालों के अंदर आधा दर्जन से ज्यादा बार ऐसी कोशिश की गई। तीन बार उनकी गोलियां हेलिकॉप्टर को लगी। लेकिन यह पहली बार है कि फायरिंग से क्षतिग्रस्त हेलिकॉप्टर की आपात लैंडिंग की स्थिति बनी।
नक्सलियों ने पहला बड़ा हमला 31 अगस्त 2007 में दंतेवाड़ा जिले गोलापल्ली इलाके में किया। मुकरम में 11 जवानों के शहीद हो जाने के बाद तत्कालीन डीजीपी विश्वरंजन छोटे हेलिकॉप्टर से घटनास्थल जा रहे थे। उनके चौपर को निशाना बनाकर नक्सलियों ने फायरिंग की। हालांकि एक भी गोली नहीं लगी।
बीजापुर के मारुड़बाका में वर्ष 2008 में विधानसभा चुनाव के दौरान एमआई-17 हेलिकॉप्टर पर फायरिंग की। घटना में एक फ्लाइट सार्जेंट की मौत हो गई।
फोर्स को उतारने के लिए भेज्जी इलाके में पहुंचे एमआई-17 हेलिकॉप्टर पर भी 2011 में नक्सलियों ने फायरिंग की। हेलिकॉप्टर को 9 से ज्यादा गोलियां लगीं।
चौथा बड़ा हमला शुक्रवार को सुकमा जिले में हुआ, जिसमें एमआई 17 को इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई।






