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बोनस की घोषणा होते ही गरमाया माहौल

भास्कर न्यूज | Feb 24, 2013, 07:06AM IST
बोनस की घोषणा होते ही गरमाया माहौल
रायपुर। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने शनिवार को विधानसभा में वित्तीय वर्ष का बजट प्रस्तुत करते समय जैसे ही किसानों को समर्थन मूल्य पर 270 रुपए बोनस देने की घोषणा की, सत्ता पक्ष ने जमकर जय जवान -जय किसान के नारे लगाए।
 
दूसरी ओर विपक्ष के विधायकों ने शोर मचा दिया कि एक साल की खरीदी पर नहीं बल्कि चारों सालों की खरीदी पर बोनस दिया जाए। वैसे कांग्रेस विधायकों ने किसानों को बोनस देने की घोषणा को अपनी जीत बताया।
 
मुख्यमंत्री सुबह 10.58 बजे सदन में पहुंचे। उन्होंने 11.01 बजे बजट भाषण पढ़ना प्रारंभ किया और 12.20 बजे खत्म किया। उन्होंने भाषण के शुरू में कवि मैथिलीशरण गुप्त और अंत में सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की कविताओं की पंक्तियां पढ़ीं। बजट भाषण के दौरान उपलब्धियों और नई घोषणाओं पर सत्ता पक्ष ने करीब 35 बार मेजें थपथपाई तो विपक्ष ने आधा दर्जन बार टोका-टाकी की।
 
धरमजीत सिंह ने स्पीकर धरमलाल कौशिक से कहा कि काले कपड़े पहनकर आए हैं क्या बजट का विरोध कर रहे हैं। आप क्रीम सूट में भी स्मार्ट लगते हैं। स्पीकर ने कहा कि बजट का कोई विरोध नहीं करता। बृजमोहन अग्रवाल ने कह कि आज शनि का दिन है कोई कुछ नहीं कर पाएगा।
 
बोनस की घोषणा पर ताम्रध्वज साहू व डॉ. हरिदास भारद्वाज ने इसे कांग्रेस की उपलब्धि बताते हुए कहा कि पिछले पांच साल बोनस नहीं दिया। अब कांग्रेस के दबाव में दे रहे हैं। पिछली भरपाई भी करें। सीएम ने कहा कि केंद्र का भी बजट आने वाला है चिंता न करें।
 
उन्होंने श्री साहू से कहा कि वे उनसे आंखें मिलाकर बात करें। डरते हैं क्या? आने वाले पांच साल और सरकार रहेगी आपको भरोसा दिलाता हूं। धरमजीत ने कहा कि बजट ढपोरशंख है। घोषणाएं करते रहें। पूरा होगा कि नहीं आगे देखेंगे। प्रतिमा चंद्राकर ने मुख्यमंत्री से मितानिनों का मानदेय बढ़ाने की मांग की।
 
बजट भाषण के बाद भाजपा विधायकों ने सीएम के पास जाकर उन्हें बधाई दी। किसी ने चरण स्पर्श किया तो किसी ने हाथ मिलाया।
 
वेतन-भत्तों पर खर्च बढ़ा
 
प्रदेश में सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों के वेतन-भत्ते और ब्याज का खर्च बढ़ता जा रहा है। टैक्स से मिलने वाली आमदनी का ज्यादातर हिस्सा नान प्लान (आयोजनेत्तर व्यय) में खर्च होगा। राज्य सरकार को टैक्स से कुल 21 हजार 372 करोड़ रुपए मिलेंगे। इसमें से 19 हजार 470 करोड़ रुपए नान प्लान यानी वेतन-भत्ते और ब्याज भुगतान पर खर्च होंगे।
 
इसमें से राज्य सरकार के सवा दो लाख कर्मचारियों के वेतन-भत्तों पर 6799 करोड़ रुपए का खर्च अनुमानित है। रिटायर्ड कर्मचारियों के पेंशन पर 2505 करोड़ रुपए खर्च होंगे। दोनों को मिला दें तो नौ हजार 304 करोड़ रुपए का खर्च सीधे तौर पर राज्य सरकार के कर्मचारी-अधिकारियों पर होगा।
 
राज्य के निगम-मंडल, यूनिवर्सिटी सहित दूसरी संस्थाओं को अनुदान के लिए 5157 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इस राशि का 90 प्रतिशत हिस्सा कर्मचारियों के वेतन और भत्ते पर खर्च होता है। इसके अलावा एशियन डेवलपमेंट बैंक, नाबार्ड और केंद्र सरकार से लिए गए कर्ज के ब्याज चुकाने में 1246 करोड़ रुपए खर्च होगा।
 
बजट में राज्य सरकार के राजस्व का हिस्सा अधिक है। कुल बजट 44 हजार 169 करोड़ का है। इसमें से आमदनी का हिस्सा 37 हजार 445 करोड़ रुपए है। राज्य सरकार को टैक्स से मिलने वाली आमदनी 21 हजार 372 करोड़ रुपए है। जबकि केंद्र सरकार से मिलने वाली आमदनी 16 हजार 72 करोड़ रुपए है। यानी आमदनी में से राज्य की हिस्सेदारी 57 प्रतिशत और केंद्र की 43 प्रतिशत है।
 
प्लान व्यय अधिक
 
कुल बजट का 24 हजार 699 करोड़ प्लान व्यय (आयोजना) में खर्च होगा। यानी इससे राज्य की संपत्ति व इंफ्रास्ट्रक्चर बनेगा। इसमें से 54 प्रतिशत राशि सामान्य क्षेत्र में खर्च होगी। जबकि 35 प्रतिशत राशि अनुसूचित जनजाति क्षेत्र और 11 प्रतिशत अनुसूचित जाति क्षेत्र में खर्च होगी।
 
आधा कृषि बजट धान पर
 
राज्य सरकार ने 8542 करोड़ रुपए का कृषि बजट पेश किया है, लेकिन इसमें से ज्यादातर राशि केवल धान पर खर्च होती दिख रही है। कृषि बजट में धान खरीदी के लिए 3102 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इसमें से 1750 करोड़ रुपए ही बोनस के रुप में किसानों को बांटे जाएंगे। शेष राशि मार्कफेड और नान (खाद्य नागरिक आपूर्ति निगम) के खाते में जाएंगे। इस वजह से किसानों को दूसरी चीजों में ज्यादा राहत नहीं मिल पाई है।
 
राज्य सरकार कृषि बजट में एक बड़ी राशि मार्कफेड और खाद्य नागरिक आपूर्ति निगम को दे रही है। इसके लिए धान उपार्जन पर 3102 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। किसानों के बोनस की रकम 1750 करोड़ रुपए को हटा दें तो 1352 करोड़ रुपए सरकार की एजेंसियों के खाते में आ रहे हैं। मार्कफेड को धान बारदाने के लिए 500 करोड़  और नुकसान के लिए 350 करोड़ रुपए मिलेंगे। नान को 500 करोड़ रुपए रिवाल्विंग फंड के लिए दिए जाएंगे। 
 
कृषि के लिए राशि कम 
 
कृषि और उद्यानिकी विभाग को मिलाकर 1656 करोड़ रुपए मिले हैं, जबकि पिछली बजट में 1483 करोड़ रुपए मिले थे। यानी प्रदेश में कृषि योजनाओं के लिए केवल 173 करोड़ रुपए का इजाफा किया गया है। यही वजह है कि कृषि में नई योजनाओं नहीं दिख रही है। ग्रीष्मकालीन धान का रकबा लगभग आठ लाख हेक्टेयर है, उसे दलहन और तिलहन क्षेत्र में बदलने के लिए विशेष प्रोत्साहन योजना में केवल 10 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। 
 
धान की रोपाई करने वाले उपकरण (पैडी ट्रांसप्लांटर) का अनुदान 40 से बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया गया है। लगभग ढाई लाख रुपए में मिलने वाले पैडी ट्रांसप्लांटर खरीदने में बड़े किसान सक्षम हो सकेंगे। इसी तरह 10 से 15 लाख रुपए में मिलने वाले धान कटाई करने वाला यंत्र कंबाइंड हार्वेस्टर पर 50 हजार रुपए का अनुदान दिया जाएगा। कृषि बजट में पशुपालन के लिए 340 करोड़, सहकारिता के लिए 274 करोड़, सिंचाई के लिए 2010 करोड़।
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