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आदिवासियों के विकास का मॉडल अलग हो : अगाथा संगमा
bhaskar news
| Jun 25, 2012, 06:00AM IST

उन्होंने कहा कि वे अधिकारिक दौरे पर नहीं हैं जिससे मंत्रालय के बारे में नहीं कहेंगी, लेकिन उनके वरिष्ठ मंत्री जयराम रमेश यहां कई बार आए हैं और यहां की समस्याओं से वे परिचित हैं। यहां के पहाड़-जंगल देख उन्हें लगा कि वे मेघालय में ही हैं। अपने पिता को भाजपा व अन्य दलों द्वारा राष्ट्रपति का प्रत्याशी घोषित किए जाने को आदिवासी होने के चलते नहीं बल्कि उनकी योग्यता को इसका आधार बताया।
पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम ने कहा कि आजादी के बाद आज तक किसी आदिवासी को राष्ट्रपति बनने का मौका नहीं मिला है। डेढ़ महीने पहले ही उन्होंने सामाजिक मंच से आव्हान करते सभी राजनीतिक दलों को अनुरोध पत्र भेजा था। आदिवासियों की बातें कहीं कोई नहीं सुनता, देश में आदिवासी राष्ट्रपति होगा तो संविधान के उल्लंघन पर रोक लगेगी। उन्होंने कहा कि आने वाला समय और ज्यादा कठिन है। यदि समाज संगठित नहीं हुआ तो ज्यादा समय तक जिंदा नहीं रह सकता।
गोली का जवाब गोली नहीं है यही हाल रहा तो आने वाले 15 साल में आदिवासी खत्म हो जाएंगे। बस्तर में सेना का विरोध करते हुए उन्होंने कहा कि यदि सेना यहां फेल हो गई तो फिर क्या अमरीकी फौज लगाएंगे। इसका जवाब किसी के पास नहीं है। बस्तर विवि की कुलपति प्रो. जयलक्ष्मी ठाकुर ने रानी दुर्गावती के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के लोगों के स्वभाव में भीरू पन नहीं होता। उन्होंने अपने हक के लिए आगे आने का आदिवासी समाज से आव्हान किया।
विधायक डॉ. सुभाऊ कश्यप ने आदिवासी नेताओं और मंत्रियों की उपस्थिति सम्मेलन में नहीं होने पर रोष जताया। उन्होंने कहा कि किसी अन्य समाज का कार्यक्रम होता है तो यही नेता पहले से जाकर वहां खड़े रहते हैं, लेकिन आदिवासी समाज के कार्यक्रम में शामिल होने का समय उनके पास नहीं है। उन्होंने कहा कि अपने संवैधानिक अधिकार के लिए किसी से भीख मांगने की जरूरत नहीं है। सरकार को कोसने से कुछ नहीं होगा हमें स्वयं आगे आना होगा।
पूर्व विधायक मनीष कुंजाम ने कहा कि आदिवासियों के लिए 32 फीसदी आरक्षण ख्वाब ही है। यहां पांचवीं अनुसूची लागू है, आदिवासी एडवाइजरी कमेटी भी है, लेकिन सलवा जुडूम के दो सालों तक इसकी बैठक तक नहीं हुई। संयुक्त राष्ट्र संघ का प्रस्ताव है कि किसी भी आदिवासी क्षेत्र में सेना नहीं बुला सकते। इसका पालन नहीं हो रहा है। पांचवीं अनुसूची के तहत राज्यपाल को सारे अधिकार हैं। इसका उपयोग उन्होंने आज तक नहीं किया। संयोजक राजाराम तोड़ेम ने आदिवासी समाज की समस्याओं को प्रश्नावली के माध्यम से लोगों के सामने रखा।
मुस्कुरा दिया बस, राष्ट्रपति के सवाल पर
रायसीना भवन में अपने पिता को राष्ट्रपति के रूप में देखना कैसा लगेगा ? के पूछे गए सवाल का जवाब न देकर केवल मुस्कुरा कर निकल ली। केंद्रीय राज्यमंत्री अगाथा संगमा उनके यहां पहुंचने पर कांग्रेसियों ने आत्मीय स्वागत रविवार को किया। यहां मंत्री अगाथा ने गोंडवाना समाज के रथ पर रखी मूर्तियों की पूजा में भी भाग लिया। उन्होंने बताया वे आदिवासी सम्मेलन में भाग लेने अदिवासी नेता अरविंद नेताम के बुलावे पर जगदलपुर जा रही है।
पानी की चिंता 4 सौ साल पहले भी
केंद्रीय राज्य मंत्री अगाथा संगमा ने कहा कि रानी दुर्गावती ने आज से 4 सौ साल पहले ही पानी की चिंता की थी। उन्होंने उस समय अपने राज्य में तालाब व कुएं खुदवाए थे। जिससे राज्य के लोगों को पानी की समस्या से जूझना न पड़े। हमें भी पानी का महत्व समझना है। सरकार भी ज्यादा ध्यान नहीं दे पा रही है इसलिए स्वयं को जागरूक होना होगा।






