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गुड्सा उसेंडी का पत्नी के साथ सरेंडर, दरभा कांड के बाद बना था नक्सलियों का प्रवक्ता

bhaskar news | Jan 09, 2014, 11:42AM IST
गुड्सा उसेंडी का पत्नी के साथ सरेंडर, दरभा कांड के बाद बना था नक्सलियों का प्रवक्ता

रायपुर/जगदलपुर. शीर्ष नक्सली नेता और दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के प्रवक्ता (गुड्सा उसेंडी) और उसकी पत्नी राजी ने हैदराबाद में आंध्रप्रदेश पुलिस की एसआईबी के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है। आंध्रप्रदेश के वारंगल जिले के देवरुपल्ली ब्लाक का रहने वाला 53 वर्षीय गुमादी वेली वेंकटा कृष्णा प्रसाद उर्फ जीवीके उर्फ सुखदेव उर्फ मुल्ला पिछले तीन दशक से छत्तीसगढ़, सीमाई आंध्रप्रदेश, ओडिशा और महाराष्ट्र में सक्रिय था। उस पर २० लाख रुपए का ईनाम घोषित था। वह पिछले कुछ समय से बीमार चल रहा था। खराब सेहत और पुलिस के बढ़ते दबाव के चलते उसने सोमवार को यह कदम उठाया। 


बुधवार की दोपहर आंध्रप्रदेश पुलिस ने इस बात की पुष्टि की। करीब छह माह पहले भी उसके समर्पण की अफवाह उड़ी थी। वेंकटा कृष्णा प्रसाद या गुड्सा उसेंडी दरभा कांड के बाद ही दंडकारण्य विशेष जोनल कमेटी के प्रवक्ता बनाए गए थे। इससे पहले उसकी जगह पर कट्टा रामचंद्र रेड्डी प्रवक्ता था। लेकिन दरभा कांड में भी उसका हाथ था। इस कांड के बाद उसने नक्सलियों की तरफ से बयान जारी किए हैं। वो प्रमुख रूप से छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में ही सक्रिय रहा है। इसके अलावा आंध्र प्रदेश, ओडिशा और महाराष्ट्र के सीमावर्ती इलाकों में भी रहा है।


अरबन नेटवर्क को मजबूत किया


इस गुड्सा उसेंडी यानी सुखदेव या मल्लू ने शहरी नेटवर्क को मजबूत करने का काम किया। उसने राजनांदगांव के मानपुर डिविजन को खड़ा किया। इतना ही नहीं शहरी क्षेत्रों में फाइनेंस की व्यवस्था करने में उसे महारथ हासिल है। वह अस्सी के दशक में नक्सलियों से जुड़ा।


पहले गुड्सा उसेंडी था रामचंद्र रेड्डी


इससे पहले गुड्सा उसेंडी कट्टा रामचंद्र रेड्डी था। उसकी पत्नी शांति प्रिया को छत्तीसगढ़ पुलिस ने भिलाई से पकड़ा था, जो जेल में है। पुलिस का कहना है कि रेड्डी भी अभी अबूझमाड़ के इलाके में है।


80 के दशक में जुड़ा था नक्सलियों से


बीमार था, ओडिशा जाने वाला था


गुड्सा उसेंडी बीमार चल रहा था। वह इलाज के लिए ओडिशा जाने वाला था। लेकिन उसने आत्मसमर्पण कर दिया। गुड्सा आंध्रप्रदेश के वारंगल जि़ले के काडीवेल्डी का रहने वाला है। उसके सरेंडर की आंध्र और छत्तीसगढ़ इंटेलिजेंस को भनक नहीं थी। गुड्सा चुपचाप वारंगल जिले के देवरुपल्ली एसआईबी के समक्ष हाजिर हुआ।
और खुद को उनके हवाले कर दिया।


 


कितना खतरनाक इससे जानिए


 


नक्सलियों का थिंक टैंक


जबरदस्त रणनीतिक विश्लेषक भी।


 मई 2013 में झीरम घाटी में हुए नक्सली हमले में शामिल, इसमें कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, विद्याचरण शुक्ल और महेंद्र कर्मा समेत 32 लोग मारे गए थे


 2010 में ताड़मेटला में सीआरपीएफ के 76 जवानों की हत्या में शामिल


 2012 में सुकमा कलेक्टर अलेक्स पाल मेनन के अपहरण में शामिल


 2009 में मानपुर राजनांदगांव के एसपी विनोद चौबे समेत 30 जवानों की हत्या में शामिल।


इसमें उसने नक्सली आयतू और रामदेव के साथ अगुवाई की थी।


- दर्जनों हिंसात्मक वारदातों का मास्टर माइंड।


 


गुड्सा नाम नहीं, पद है प्रवक्ता का


युवा रिवोल्यूशन के नाम से बने फेसबुक वॉल पर लिखा है कि गुडसा उसेंडी नेवर डाइस, फैंटम आफ दंतेवाड़ा। गुड्सा उसेंडी किसी व्यक्ति का नाम नहीं है। यह दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के प्रवक्ता का तयशुदा नाम है। दरअसल अबूझमाड़ में गुड्सा उसेंडी नाम का एक किशोर छापामार साल 2000 में पुलिस से मुठभेड़ के दौरान मारा गया था। छापामार की स्मृति को संजोए रखने उसके नाम को जीवित रखा गया है।


पब्लिकेशन से जुड़े काम देखती थी पत्नी राजी


गुड्सा की पत्नी राजी नक्सलियों के पब्लिकेशन से जुड़े काम देखती है। नक्सली साहित्य, पर्चे इत्यादि के प्रकाशन में उसका अहम रोल है। 


छग पुलिस को नहीं थी कोई जानकारी: डीजीपी


डीजीपी रामनिवास और नक्सल ऑपरेशन के एडीजी आरके विज ने कहा कि गुड्सा उसेंडी के सरेंडर की राज्य पुलिस को कोई जानकारी नहीं थी। गुड्सा ने सुनियोजित तरीके से सरेंडर किया, जिस पर छग में दो लाख रुपए समेत आंध्र और ओडिशा में तकरीबन 20 लाख रुपए का ईनाम घोषित था।

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