विधानसभा चुनाव में नेतृत्व को लेकर प्रदेश कांग्रेस में छिड़ गया घमासान

रायपुर.विधानसभा चुनाव की सरगर्मी तेज होने के साथ ही प्रदेश कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर घमासान मच गया है। प्रदेश कांग्रेस का नेतृत्व कर रहे तीन नेताओं के ‘त्रिफला’ में से एक केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री डॉ. चरणदास महंत ने दो टूक कह दिया कि वरिष्ठ नेता अब सेकंड लाइन लीडरशिप को मौका दें। सीनियर अब केवल मार्गदर्शक की भूमिका निभाएं। डॉ. महंत के अलावा ‘त्रिफला’ के सदस्य हैं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल और नेता प्रतिपक्ष रविंद्र चौबे।
ऐसा माना जाता है कि इनके नेतृत्व को जोगी खेमे की ओर से चुनौती मिल रही है। बीच में ‘त्रिफला’ के टूटने की खबरें आईं। यह कहा गया कि महंत ने जोगी से हाथ मिला लिया है। इन राजनीतिक चर्चाओं के बीच शुक्रवार को नई दिल्ली रवाना होने से पहले डॉ. महंत ने पत्रकारों से बातचीत में इस पूरे विवाद को नया मोड़ दे दिया।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नए लोगों को मौका दें। सेकंड लाइन के नेताओं को नेतृत्व देने से परिवर्तन आएगा। अभी हम तीन लोग सेकंड लाइन के नेता हैं। पहली पंक्ति के नेताओं को दूसरी पंक्ति के नेताओं की नेतृत्व क्षमता विकसित करनी चाहिए। संगठन में हस्तांतरण से मन में पीड़ा जरूर होती है, लेकिन यही परंपरा है।
महंत के बयान पर अजीत जोगी ने कहा, ‘मैं अभी वरिष्ठ नहीं हुआ हूं।’ जोगी बोले-प्रदेश में दो ही वरिष्ठ नेता हैं राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल। मैं उनकी जगह पर नहीं हूं, वे मेरे सीनियर हैं। जोगी ने यह भी कहा, मैं मुख्यमंत्री रहा हूं, लेकिन अभी मेरी वह श्रेणी नहीं है। जब वीसी शुक्ल 1956 में सांसद बने थे, तब मैं 9-10 साल का था। संगठन में सेकंड लाइन के नेताओं को नेतृत्व देने का हम स्वागत करते हैं।’
अनायास नहीं है यह विवादप्रदेश कांग्रेस में छिड़ा यह विवाद अनायास सामने नहीं आया है। जोगी खेमा और संगठन खेमा काफी समय से आमने-सामने है। राजनीतिक हलकों में यह बात जाहिर तौर पर कही जाती है कि जोगी खेमे को दरकिनार करते हुए पटेल, चौबे और महंत को सामने किया गया है। पिछले दिनों रायपुर में भाजपा सरकार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान भी जोगी खेमे ने अपनी ताकत दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी।
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