महासमुंद जिला जेल में इन दिनों आपके आंगन की फिक्र हो रही है। यहां के विचाराधीन और सजायाफ्ता बंदी आपके घर को सजाने में लगे हुए हैं। लूट की घटना के बाद पकड़े गए उत्तरप्रदेश के शफीक नामक बंदी ने अपनी रिहाई के पहले यहां के तकरीबन 7 विचाराधीन बंदियों को गमला बनाने का हुनर सिखाया है।
शफीक का यह मानना था कि अपराध जान बूझकर नहीं किया जाता, मुसीबत अपराध करवा देती है लेकिन जेल के बंदी सुधार अभियान ने उसे नई दिशा दी है और इसी दिशा पर चलते हुए उसने यह ठान लिया कि अब वह स्वरोजगार और पुनर्वास का लक्ष्य हासिल करेगा। जेल में बने बड़े-बड़े गमलों को इन दिनो सरकारी बंगलों और कार्यालयोंे तक पहुंचाया जा रहा है। जल्द ही यहां के बने गमले बाजार में पहुंच जाएंगे।
बंदियों की इच्छा का भी रखा जा रहा पूरा ख्याल
जिला जेल में पदस्थ उपजेलर डीडी टोंडर का कहना है कि बंदियों के मानवाधिकार का भी जेल में पूरा-पूरा ख्याल रखा जाता है। बंदियों में व्याप्त हुनर का उनकी इच्छा के मुताबिक उपयोग किया जाता है। जिला जेल में अधिकांश बंदी चित्रकला में भी रूचि रखते हैं उनके द्वारा बनाए चित्रों को आज भी यहां की दीवारों में सहेज कर रखा गया है।
उन्होंने बताया कि जेल परिसर में पानी की काफी तंगी है, यहां के बोर में पर्याप्त पानी नहीं होने के कारण पानी से बनने वाले उत्पादों को संचालित करने में काफी अड़चने आती है, बावजूद इसके बंदियों की इच्छा का ख्याल रखते हुए नर्सरी और गमला निर्माण को जारी रखा जा रहा है। जल्द ही यहां की पेयजल व्यवस्था को दुरूस्त किए जाने के प्रयास किए जा रहे हैं।