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सुपर स्पेशल सुविधा, शहरवासियों को 2014 तक मिल पाएगी यह खुशखबरी

Bhaskar News | Jul 23, 2013, 04:45AM IST
सुपर स्पेशल सुविधा, शहरवासियों को 2014 तक मिल पाएगी यह खुशखबरी

रायपुर. एम्स के अस्पताल की सुपर स्पेशियालिटी सुविधाओं का इंतजार लंबा हो सकता है। भवन निर्माण और मशीनों के इंतजाम में देरी से पूरा प्रोजेक्ट तय समय से एक साल से भी ज्यादा पिछड़ गया है। ट्रॉमा सेंटर और आयुष पीएमआर को अगस्त में शुरू करने का दावा था, पर इसके लिए जरूरी ऑपरेशन थियेटर अब तक तैयार नहीं हुआ है। उसमें लगने वाली मशीनें भी नहीं आई हैं। इसमें कम से कम दो महीने का समय लगेगा। एम्स के 930 बिस्तरों वाले मुख्य अस्पताल की बिल्डिंग भी एक साल बाद यानी 2014 के अंत तक ही पूरी हो पाएगी।


एम्स अस्पताल के शुरू होने से प्रदेशभर के लोगों को निजी अस्पतालों की तुलना में कम खर्च पर विश्व स्तरीय इलाज मिलने लगेगा। अस्पताल की मुख्य बिल्डिंग में देर होते देख एम्स प्रबंधन ने पहले चरण में ट्रॉमा सेंटर और आयुष


पीएमआर वार्ड तैयार करने की योजना बनाई थी। ट्रॉमा सेंटर की बिल्डिंग लगभग पूरी हो चुकी है। इसमें पेंटिंग, बिजली फिटिंग व सफाई का काम बाकी है। आयुष पीएमआर वार्ड का 85 फीसदी से ज्यादा काम हो चुका है। आयुष में कम गंभीर मरीजों को भर्ती किया जाता है। मेन अस्पताल बिल्डिंग का निर्माण कार्य चल रहा है, लेकिन इसके पूरी तरह से तैयार होने में सालभर का समय लग सकता है। इसमें कुल 26 ओटी बनने हैं। यह ट्रॉमा सेंटर में बनने वाले ४ ओटी के अलावा होंगे। ६ हॉस्टल बनने हैं। यह काम ३ माह में पूरा होगा।


 


गौरतलब है कि, पिछले साल से 50 सीटों  के साथ एमबीबीएस प्रथम वर्ष की कक्षाएं शुरू हो चुकी हैं। इस साल एमबीबीएस के 100 छात्रों के साथ कक्षाएं शुरू होंगी। इस हिसाब से लेक्चर हाल और लैब की भी जरूरत होगी। प्रबंधन का दावा है कि सेकंड ईयर के लिए उनकी तैयारी पूरी है।


ओटी का काम अटका, अगस्त में नहीं शुरू हो पाएगा ट्रॉमा सेंटर


 


हां, देरी तो हो गई है


लक्ष्य के हिसाब से अस्पताल शुरू करने में देरी हुई है, पर बिल्डिंग निर्माण का काम तेजी से चल रहा है। ट्रॉमा सेंटर व आयुष पीएमआर 15 सितंबर तक शुरू हो सकता है। इसके लिए ओटी का काम अगले माह शुरू होगा। सुपर स्पेशियालिटी डॉक्टरों की भर्ती जल्द शुरू होने की संभावना है।


डॉ. अजय दानी, अधीक्षक एम्स


 


दूसरे फेज में था जनरल विभाग


एम्स प्रबंधन ने दूसरे फेज में मेडिसिन, सर्जरी, गायनाकोलॉजी और पीडियाट्रिक्स विभाग के 60-60 बेड के वार्ड शुरू करने की योजना बनाई थी। निर्माण पूरा नहीं होने के कारण यह अटक रहा है। योजना के अनुसार साइकेट्री, ऑप्थेलमोलॉजी, आथरेपेडिक्स व ईएनटी के 30-30 बेड वाले वार्ड में मरीजों का इलाज होगा। स्किन व कैंसर विभाग में 10-10 बेड, फिजिकल मेडिसिन व रिहैबिलिटेशन तथा आयुष विभाग 30-30 बेड का होगा।


 


एनेस्थिसिया, रेडियोलॉजी, ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन व ब्लड बैंक तथा डेंटल विभाग की सेवाएं मरीजों को सिर्फ दिन में मिल पाएंगी। बाद में इस सेवा को भी 24 घंटे का किया जाएगा।


 


तीसरे फेज में स्पेशियालिटी विभाग


तीसरे फेज में सुपर स्पेशियालिटी विभागों में इलाज शुरू करने की योजना है। ये विभाग मई-2014 में शुरू करने का प्रस्ताव है, पर इसमें भी देरी हो सकती है। कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, रियूमेटोलॉजी, पल्मोनरी मेडिसिन, गेस्ट्रोलॉजी, हेमेटो ओंकोलॉजी, सर्जिकल ओंकोलॉजी, जीआई सर्जरी, यूरोलॉजी, न्यूरो सर्जरी, पीडियाट्रिक सर्जरी तथा प्लास्टिक सर्जरी व बर्न विभाग का 30-30 बेड का वार्ड रहेगा। न्यूक्लियर मेडिसिन का इलाज सिर्फ दिन में होगा।


 


एम्स में कुल 930 बेड का अस्पताल शुरू करने की योजना है।


 


 


बिल्डिंग निर्माण की ताजा स्थिति (कंस्ट्रक्शन का काम देख रहे अधिकारियों के अनुसार)


 


अस्पताल


 65% काम हो पाया है


 


मेडिकल कॉलेज


80% काम हो चुका है


 


 


ट्रॉमा सेंटर


95% काम हो चुका है


 


आयुष पीएमआर


 65% पूरा हुआ अब तक


 


 


सभी हॉस्टल


 60% काम हो पाया है


 


 


 


ट्रॉमा सेंटर के लिए ओटी जरूरी, न्यूरो सर्जन भी नहीं


ट्रॉमा सेंटर के लिए ओटी जरूरी है। प्रबंधन के अनुसार ट्रॉमा सेंटर 90 व आयुष पीएमआर 60 बेड का होगा। यहां चार मॉड्यूलर ओटी होंगे। ओटी का स्ट्रक्चर खड़ा हो गया है। मशीन के लिए टेंडर भी हो चुका है, लेकिन ओटी बनाने का काम शुरू नहीं हुआ है। मॉड्यूलर ओटी का निर्माण टेंडर लेने वाली एजेंसी करेगी। कमरा पूरी तरह तैयार होने के बाद मशीन लगाने का काम शुरू होगा। इसमें डेढ़ से दो माह लग सकते हैं। इस वार्ड में न्यूरो सर्जरी, जनरल सर्जरी, अस्थि रोग, नेत्र रोग, ईएनटी के विशेषज्ञों की जरूरत होगी। अभी ट्रॉमा के लिए पांच विशेषज्ञ हैं, लेकिन एम्स में एक भी न्यूरो सर्जन की भर्ती नहीं हो पाई है।


 


 


सड़क दुर्घटना के केस में सिर में चोट वाले मरीज ज्यादा आते हैं। ऐसे मरीजों का इलाज न्यूरो सर्जन ही कर सकता है। सुपर स्पेशियालिटी डॉक्टरों की भर्ती की प्रक्रिया अभी तक शुरू नहीं हुई है। इसमें डेढ़ से दो महीने लग सकते हैं।


 

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