भारत की एक ऐसी बिल्डिंग जिसमें 'न चिंगारी फूटेगी और न धुंआ उठेगा'

रायपुर. नई राजधानी में हमारे छह मंजिला नए मंत्रालय में अगर आग लगी भी तो बेअसर रहेगी। उसे तांडव दिखाने से पहले ही कंप्यूटराइज्ड और अत्याधुनिक फायर सिस्टम से बुझा दिया जाएगा। दिलचस्प यह कि यहां फायर रेसिस्टेंस डोर लगे हैं, जो आग को कमरों में घुसने से रोकेंगे। महाराष्ट्र के मंत्रालय भवन में हुए अग्निकांड के बाद रजिस्ट्रार एनके भट्टर ने गुरुवार को पूरी टीम के साथ डीके भवन के मंत्रालय के चप्पे-चप्पे की जांच की। फायर अलार्म के अलावा आग को काबू करने के इंतजामों को परखा गया।
मुंबई मंत्रालय की बरसों पुरानी बिल्डिंग में ये सब इंतजाम नहीं होने से गुरुवार को बड़ा नुकसान हुआ। प्रदेश के सबसे बड़े प्रशासनिक भवन में राज्योत्सव के दौरान शिफ्टिंग की योजना है। नए मंत्रालय में कंप्यूटराइज्ड सिस्टम से कंट्रोल रूम से ही यह तुरंत पता लगाया जा सकेगा कि आग किस फ्लोर में कहां लगी है। विशेषज्ञों ने सभी फ्लोर पर फायर अलार्म और फायर डिटेक्टर लगाए हैं। मुख्यमंत्री, मंत्री, वीवीआईपी के कमरों व कंप्यूटर रूम में स्पेशल फायर रेसिस्टेंस डोर लगाए गए हैं।
ये अग्निरोधी हैं। यानी आग लगने पर ये दरवाजे आग को कमरों में प्रवेश नहीं देंगे। कम से कम एक घंटा तो इन दरवाजों पर आग बेसर रहेगी।सभी कमरों में ऑटोमैटिक स्प्रिंकलर सिस्टम लगे हैं। इनसे पानी का छिड़काव किया जा सकता है। इसमें पानी सप्लाई करने वाली टंकियां अलग बनाई गई हैं जो हमेशा भरी रहेंगीं। इसी तरह पूरी बिल्डिंग के चारों और पाइप लगाए गए हैं। इनके लिए भी अलग से पानी की टंकी है।
दुर्घटना होने पर इन पाइपों के जरिए भी जरूरत पड़ने पर पानी का छिड़काव किया जा सकता है। नई राजधानी विकास प्राधिकरण के सीईओ एसएस बजाज के अनुसार आग के दौरान लिफ्ट का उपयोग नहीं किया जाता। इसलिए नए मंत्रालय में हर ब्लाक में दो-दो आपात सीढ़ियां बनाई गई हैं। इनके जरिए भवन से बाहर निकला जा सकता है। नया मंत्रालय पेपरलेस होगा इसलिए बड़ी मात्रा में कंप्यूटर व इलेक्ट्रॉनिक यंत्र इस्तेमाल होंगे। इसलिए सुरक्षा के मद्देनजर पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
डीके भवन में फायर यंत्र और पर्याप्त दरवाजे
वर्तमान मंत्रालय में ग्राउंड फ्लोर समेत तीन मंजिलें हैं। इसमें नियमित अधिकारी-कर्मचारी, प्रतिनियुक्ति, दैनिक वेतन भोगी समेत लगभग एक हजार लोग काम करते हैं। एमपी से विभाजन के बाद यहां लाया गया महत्वपूर्ण रिकार्ड व दो लाख फाइलें भी हैं। 60 साल पुराने भवन में 250 कमरे व हॉल हैं। अब तक यहां आग लगने जैसी घटनाएं तो नहीं हुईं हैं, लेकिन इसके लिए पूरा इंतजाम है।
छत पर पानी की टंकियां हैं। जिनमें भरपूर पानी रहता है। हर फ्लोर पर आग बुझाने वाले यंत्र हैं। एक फायर मैन इस पर नजर रखता है। भवन में पांच प्रवेश द्वार हैं। इनमें से तीन का ही उपयोग हो रहा है। जरूरत पड़ने पर कैंसर यूनिट के पास व ग्राउंड फ्लोर का गेट नंबर तीन खोलने में कुछ मिनट ही लगेंगे। खिड़कियां व गलियारे में लगे कांच इतने बड़े हैं कि सानी से बाहर निकला जा सकता है।









