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बेल्जियम का छल्ला भी काम नहीं आया मैना की ब्रीडिंग में
Bhaskar news | Aug 05, 2012, 05:58AM IST

सालभर पहले थाईलैंड की थाई हिल (पहाड़ी मैना) की तर्ज पर ब्रीडिंग कराने के लिए बॉम्बे स्थित नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी के वैज्ञानिक डॉ. विभु प्रकाश ने बस्तर आकर इसकी रूपरेखा तैयार की, लेकिन इसके बाद यह योजना भी ठंडे बस्ते में चली गई। यही वजह है कि अब विभाग ब्रीडिंग कराने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है।
अधिकारी भी हो चुके परेशान : अधिकारियों का मानना है कि पहाड़ी मैना संभाग के विभिन्न क्षेत्रों में पाई जाती है तो कांगेर घाटी में दिखाई देने वाले मैना के झुंड पर ही लोग क्यों उम्मीद लगाए हुए हैं। विभाग अपने स्तर पर कार्य कर रहा हैं यदि इसमें सफलता या असफलता मिलती है तो इसे स्वीकार करना चाहिए न कि विभाग की खिंचाई। केवल विभाग की जिम्मेदारी नहीं कि इसे संरक्षित किया जाए। इसके संवर्धन व संरक्षण के लिए सभी को सामने आना चाहिए। प्रबंधन अपने स्तर पर प्रयास कर रहा है।
सीएफ वन्यप्राणी वी रामाराव पहाड़ी मैना की ब्रीडिंग कराने की कोशिश किया जा रहा है, लेकिन इसमें अब तक कोई खास सफलता नहीं मिल पाई है। प्रयास किया जा रहा है।
पहले पिंजरा फिर कमरा
पहाड़ी मैना की संख्या बढ़ाने के लिए विभाग ने पहले तो वन विद्यालय में एक विशालकाय पिंजरा तैयार कर उसमें कुछ पहाड़ी मैना को एक साथ रखा। जो धीरे-धीरे पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया। मैना पर होने वाला खर्च निकालने के लिए यहां टिकट सिस्टम लागू कर दिया गया। इसके साथ ही शिकारियों से पकड़े गए पांच मैना को तीरथगढ़ में एक विशेष स्थान पर रखा गया था। जहां किसी को आने-जाने की अनुमति नहीं थी। यहां भी कुछ होता न देख अब विभाग आखिरकार इन सब पहाड़ी मैना को खुले असमान में छोड़ने की तैयारी कर रहा हैं।






