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नक्सल नेता ने ही उजागर किया 'नक्सलियों का खूनी खेल'

bhaskar news | Jul 12, 2012, 04:48AM IST
 
 

रायपुर. नक्सलियों के आतंक और क्रूरता के खूनी खेल को उनके ही एक नेता ने उजागर कर दिया है। माओवादियों के शीर्ष नेताओँ में से एक सब्यसाची पांडा ने माओवादियों के शीर्षस्थ नेता गणपति को 16 पेज का एक पत्र लिखकर माओवादियों द्वारा की जा रही आदिवासियों और निरीह नागरिकों की हत्याओं , माओवादी शिविरों में बलात्कार की वीभत्स घटनाओं और बेवजह हिंसा, जिसमें गला रेतकर हत्या करना और शिविरों में सबके सामने फांसी देने का विरोध किया है।


पांडा ने पत्र में एक एक घटना का जिक्र भी किया है। पत्र में उसने गणपति से सवाल किया है कि इससे क्या हासिल हुआ है और हम कौन सी क्रान्ति कर रहे है ।
गणपति आतंक और डर पर आधारित एक तानाशाही तंत्र स्थापित करना चाहते हैं। इस तंत्र के तहत नक्सल संगठन और समाज में विरोधी आवाजों को निर्ममतापूर्वक कुचला जा रहा है। पांडा ने अपने इलाके में आये कुछ नक्सली नेताओं जिनमें किशन जी भी शामिल था का जिक्र करते हुए कहा कि, उन्होंने नक्सली कैडर को पुलिस वालों की अंधाधुंध हत्याओं का आदेश दिया।


पांडा ने कहा कि निदरेष और निहत्थे पुलिसवालों को मारकर कौन सी क्रान्ति का आगाज किया जा रहा है। पांडा ने कहा कि क्या नक्सलियों का काम केवल हत्याएं करना ही है। पत्र में पांडा ने यह भी उल्लेख किया की नक्सली संगठन में आदिवासियों का शोषण किया जा रहा है। आदिवासियों को शोषण से बचाने के नाम पर नक्सली लड़ाई लड़ रहे हैं पर वास्तव में माओवादी ही उनका सबसे ज्यादा शोषण कर रहे है। उनसे सामान ढोने और खाना बनाने जैसे काम लिये जा रहे है। आदिवासी युवतियों का यौन शोषण किया जा रहा है। नक्सली कैडर की मृत्यु होने पर उसकी लाश भी उसके परिजनों को नहीं सौंपी जाती है।
 
 
 

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