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मेयर की चुनौती: कहा इस्तीफा दे दूंगी, नाकामी साबित करो

 
Source: bhaskar news   |   Last Updated 02:05(01/02/12)
 
 
 
 
रायपुर। सांसद रमेश बैस की अध्यक्षता में सोमवार को हुई भाजपा नेताओं की बैठक में शहर विकास के बारे में हुई चर्चा और महापौर किरणमयी नायक को घेरने की राजनीति का मामला गरमा गया है।




तोडफ़ोड़ के एवज में मुआवजे, फोरलेन के टोल प्लाजा, विकास के कामों की रफ्तार थमने जैसे आरोपों ने बिफरी महापौर ने राजधानी के दोनों मंत्रियों बृजमोहन अग्रवाल, राजेश मूणत और सांसद रमेश बैस पर ही सीधे हमला बोल दिया है। सांसद रमेश बैस ने मंगलवार को दोबारा कहा कि कल की बैठक में अगले दो साल में राजधानी के विकास को लेकर चर्चा हुई। उन्होंने साफ कहा कि हमारा काम पॉलिसी बनाना है।



महापौर की जिम्मेदारी उस पर अमल करना है। रायपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष और नगर निगम के पूर्व महापौर सुनील सोनी भी मुआवजे के मुद्दे पर खुलकर सामने आ गए हैं। सांसद रमेश बैस के सुर में सुर मिलाते हुए उन्होंने साफ कर दिया है कि बिना मुआवजा तोडफ़ोड़ होनी ही नहीं चाहिए। इस बात का वह शुरू से विरोध कर रहे हैं। नीति में बदलाव होना चाहिए।



मुझसे डर गए हैं मंत्री व सांसद : किरणमयी



राजधानी के विकास को लेकर सांसद के घर बैठक में दोनों मंत्रियों के अलावा सभापति, नेता प्रतिपक्ष, निगम आयुक्त की मौजूदगी और शहर की मुखिया को हवा तक नहीं। पर्याप्त पैसा दिए जाने के बावजूद शहर में विकास नहीं होने देने के भाजपा नेताओं के आरोपों से महापौर डॉ. किरणमयी नायक बिफर गई हैं। भास्कर से चर्चा में नायक ने साफ कहा कि उनके दो साल के कार्यकाल में शहर में जिस रफ्तार से विकास हो रहा है, उससे मंत्री और सांसद डर गए हैं। इसी डर ने इन विरोधी नेताओं को एकजुट होने पर मजबूर कर दिया है। भाजपा नेताओं पर सीधा हमला बोलते हुए नायक ने कहा कि अमीर और गरीबों पर कार्रवाई के मामले में ये नेता-मंत्री एक्सपोज हो गए हैं।



डंगनिया में गरीबों के मकान बिना मुआवजा तय किए बुलडोजर चलाकर तोड़ दिए गए, लेकिन सदरबाजार या रामसागरपारा के सेठों की बारी आई तो मुआवजे का मुद्दा उठाया जा रहा है। मंत्री राजेश मूणत में हिम्मत हो तो वहां भी डंगनिया जैसी कार्रवाई करके बताएं। डंगनिया के गरीबों के मकान-दुकानों पर हुई कार्रवाई से भाजपा के नेता फंस गए हैं। उनको अपनी पोल खुलने का डर सता रहा है। यही वजह है कि वह मेरे खिलाफ लामबंद हो गए हैं। मुझे दबाने की कोशिश हो रही है। जहां तक शहर में काम नहीं करने या विकास कार्यो की रफ्तार को रोकने की बात है, तो मैं मंत्री, सांसद को चुनौती देती हूं कि वह इसे साबित करके दिखा दें। मैं कोरे कागज पर इस्तीफा लिखकर देने को तैयार हूं।



सुनील सोनी की तरह कोरी बयानबाजी करने से कुछ नहीं होता। मैं तो भाजपा के मंत्रियों या सांसद को खुला चैलेंज देती हूं कि इंडोर स्टेडियम या किसी भी सार्वजनिक जगह पर आम लोगों के सामने बहस कर लें। यह साबित कर दें कि मैं शहर के काम नहीं होने दे रहीं। मैं भी बताऊंगी कि किस तरह से एमआईसी, सामान्य सभा के कामों को रोका जा रहा है। पसंद का ठेकेदार नहीं मिलने तक मंत्री विकास के कामों को मंजूर नहीं करते। निगम के हर काम में हस्तक्षेप कर रहे हैं। महापौर के आदेश नहीं मानने के निर्देश निगम अधिकारियों को दिए जाते हैं। यह पूछा जाना चाहिए कि मूणत को क्या प्रदेश का कोई और नगर निगम नहीं दिखता। दो साल में तीन आयुक्त सरकार बदल चुकी है।



सरकार चाहती है कि मेरे कार्यकाल में कोई काम ही न हो, ताकि मुझे बदनाम किया जा सके। ऐसा होने नहीं दूंगी। डटकर मुकाबला करूंगी। मैं जनता के दम पर महापौर बनी हूं। न मुझे कमीशन चाहिए, न ठेकेदारी मैं करवाती हूं। न गलत काम करती हूं, न बर्दाश्त करूंगी। रही बात काम की, तो मैं चैलेंज करती हूं कि छह महीने मुझे फ्री हैंड दे दिया जाए। फिर दिखा दूंगी कि शहर में काम कैसे होता है। हाइड्रालिक फायर टेंडर के लिए जब निगम ने सारी प्रक्रिया पूरी कर दी, तो मंत्री राजेश मूणत ने पैसा वापस ले लिया। विकास की वे बातें ही करते हैं, कोशिश की जाए तो अड़ंगा लगाया जाता है।



शहर में क्या होगा हम तय करेंगे



राजधानी के विकास को लेकर सोमवार को हुई बैठक में महापौर को नहीं बुलाए जाने के मसले पर सांसद रमेश बैस का कहना है कि यह बैठक पार्टी की थी। सरकारी नहीं। वैसे भी शहर में विकास कैसा हो, पॉलिसी क्या होगी यह तय करना हमारा काम है। महापौर का काम केवल इस पर अमल करना है।



सांसद ने साफ कर दिया है कि सड़क चौड़ीकरण के पहले मुआवजा देना होगा। बैस ने दो टूक शब्दों में कहा कि एक शहर में एक ही काम के लिए दो कानून नहीं हो सकते। जब आमापारा चौक से लेकर तात्यापारा चौक तक के लोगों को चौड़ीकरण के लिए मुआवजा मिला है, तो तात्यापारा से शारदा चौक या आमापारा से तेलघानीनाका या डंगनिया के लोगों को क्यों छोड़ा जाए। सरकार वीआईपी रोड चौड़ीकरण प्रभावितों को भी मुआवजा दे रही है। बैस ने कहा कि शहर में विकास के ऐसे कामों को प्राथमिकता दी जाएगी, जो दो साल में पूरे हो सकते हैं। तात्यापारा से शारदा चौक, आमापारा से तेलघानी नाका, वीआईपी रोड चौड़ीकरण समेत कई ऐसे काम हैं, जो पूरे नहीं हुए। इन बातों पर कल मंत्रियों के साथ चर्चा हुई।



आरडीए अध्यक्ष ने कहा - मुआवजा मिले



आरडीए के अध्यक्ष और नगर निगम के पूर्व महापौर सुनील सोनी भी मुआवजे के मुद्दे पर बैस के साथ हैं। उन्होंने कहा कि महापौर के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने 14 सड़कों का चौड़ीकरण किया। कहीं विवाद नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि आमापारा चौक से लेकर शारदा चौक तक चौड़ीकरण में दो नियम कैसे हो सकते हैं। प्रभावितों को एफएआर बढ़ाकर देने या किसी और तरीके से राहत दिए बिना उसके निर्माण को तोड़ना गलत है। घर उजाड़कर शहर को सुंदर बनाने के वह खिलाफ हैं।



स्टेशन रोड और तेलीबांधा रोड़ चौड़ीकरण प्रभावितों के पुनर्वास में राजनीति का आरोप भी उन्होंने लगाया। सोनी ने कहा कि निगम को पांच-छह सड़कों का प्रोजेक्ट बनाकर भेजना चाहिए। आमापारा से अग्रसेन चौक, फाफाडीह से टिंबर मार्केट, संजय गांधी चौक से मौदहापारा, तात्यापारा-शारदा चौक तक सड़क चौड़ा करने में 25-30 करोड़ का मुआवजा देना पड़ेगा।
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
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