वर्तमान में चेक क्लियर कराने के लिए बैंकों की शरण में जाना पड़ता है। इसके लिए लंबी कतार भी लगती है। चेक क्लियर होने में अधिकतम दो से तीन दिन लग जाते हैं। तीन-चार माह पहले कुछ राष्ट्रीयकृत बैंकों ने शाखा से लगे एटीएम में चेक ड्राप बाक्स रखना शुरू किए हैं। इसे बैंक का कर्मचारी कलेक्ट करता है। देश के कुछ ही बड़े शहरों में एटीएम से चैक क्लियर हो रहे हैं।
यह सुविधा मिलने से बैंकों में लगने वाली कतार भी कम हो जाएगी। बैंकों का कागजी काम भी कम हो जाएगा। स्थानीय बैंक अधिकारियों के अनुसार नई तकनीक अपनाने के लिए एटीएम बदलने होंगे। नई तकनीक वाले एटीएम में चेक से कैश अकाउंट में जाना बड़ी बात नहीं होगी। हालांकि इसमें कुछ समय लग सकता है। एसबीआई के अधिकारियों के अनुसार अभी किसी प्रकार की टेस्टिंग यहां नहीं चल रही है। बड़े शहरों में जरूर इस तरह की टेस्टिंग चल रही है।
लोकसभा में उठा था सवाल :
हाल ही में लोकसभा में यह जानकारी केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री एनएन मीणा ने दी थी। सांसद एस. पक्किरप्पा ने यह सवाल पूछा था।
श्री मीणा ने जवाब में बताया कि इंडियन बैंक एसोसिएशन ने इस संबंध में रिपोर्ट दी है और इस तकनीक की टेस्टिंग भी कुछ बैंक करने जा रहे हैं। यह सुविधा शुरू होने के संबंध में श्री मीणा ने कहा बैंक अपनी तकनीक की स्थिति व ग्राहकों द्वारा इसके स्वीकार्य करने की पूरी समीक्षा कर इसे अपनाएंगे। खंडेलवाल कमेटी ने इस तरह के सुझाव दिए थे और कुछ विकसित देशों में यह सुविधा उपलब्ध भी है।
बड़े शहरों में नई तकनीक की टेस्टिंग चल रही है। रायपुर में यह तकनीक आने में कुछ समय लग सकता है। यह तकनीक आने से ग्राहकों को सुविधा होगी।
आर गोखले, एजीएम एसबीआई, जोन एक छत्तीसगढ़
नई तकनीक आने के बाद एटीएम में चेक डालने के बाद कैश अकाउंट में आ जाएगा। यह तकनीक अभी नहीं आई है। इसमें कुछ समय लग सकता है। वर्तमान में शाखा से लगे एटीएम में चेक ड्राप बाक्स रखे गए हैं, जिसे कलेक्ट कर चेक क्लियर किया जाता है।
रमाकांत शर्मा, एटीएम चैनल मैनेजर स्टेट बैंक आफ इंडिया
नई तकनीक के बारे में सुना है, पर ज्यादा जानकारी नहीं दे पाऊंगा। कनवर्टेड चेक से नई तकनीक का उपयोग किया जा सकता है।
मोहन सैमुअल, चीफ मैनेजर सेंट्रल बैंक आफ इंडिया