घर से चले थे भविष्य बनाने लेकिन तीनों के रास्ते में खड़ा था भयानक काल!

रायगढ़। धरमजयगढ़ के पीपरमार गांव में उस समय मातम का माहौल छा गया, जब एक ही घर से परीक्षा देने गए तीन छात्रों में से दो की घर लौटने के दौरान सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। तीसरा युवक घायल हो गया। घटना रविवार की दोपहर 3 बजे की है।
नई बाइक पर सवार प्रवीण पटेल पिता अरुण पटेल 17 वर्ष, नंद कुमार पटेल पिता हेमचंद पटेल 17 वर्ष व प्रमोद पटेल पिता जीवन पटेल 17 वर्ष शहर के सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल में पीपीटी की परीक्षा देने आए थे। सुबह की पाली में परीक्षा देकर तीनों छात्र अपने घर धरमजयगढ़ के पीपरमार को लौट रहे थे। इस बीच घरघोड़ा थाना क्षेत्र के फगुरामोड़ के आगे पासवान ढाबा के पास बरौद की ओर से तेज रफ्तार से आ रही एक अनियंत्रित ट्रेलर क्रमांक सीजी04 ए 4671 ने बाइक को ठोकर मार दी। इससे बाइक दुर्घटनाग्रस्त हो गई। प्रवीण व नंद कुमार की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। जबकि तीसरा छात्र प्रमोद गंभीर रूप से घायल हो गया। घरघोड़ा टीआई केएन आदित्य सूचना मिलते ही एंबुलेंस के साथ मौके पर पहुंचे और घायल प्रमोद को घरघोड़ा अस्पताल में भर्ती करवाया। जहां चिकित्सकों ने उसे जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया।
टीआई केएन आदित्य ने बताया कि बाइक को ठोकर मारने के बाद आरोपी चालक मौके का फायदा उठाते हुए ट्रेलर छोड़ वहां से फरार हो गया। पुलिस ने ट्रेलर को जब्त लिया है। वहीं फरार आरोपी चालक के खिलाफ आईपीसी की धारा 279/337/304ए के तहत अपराध कायम कर उसका पता लगाया जा रहा है।
किसकी है जिम्मेदारी?
समाज को झकझोर देने वाले इस हादसे ने सबके सामने एक सवाल खड़ा कर दिया है कि नाबालिग के हाथों में वाहन देना कहां तक उचित है। घरघोड़ा के पास हुए इस हादसे ने एक ही परिवार के दो बच्चों की जान ले ली। रायगढ़ शहर में ही न जाने ऐसे कितने नाबालिग हैं जो सड़कों पर फर्राटे से बाइक भगाते नजर आते हैं। उन पर कोई रोक लगाने का जिम्मा किसका है। क्या सब कुछ पुलिस ही करेगी? क्या अभिभावकों की कोई जवाबदेही नहीं? ऐसे वक्त में हमेशा प्रशासन को क्यों कोसा जाता है? पुलिस अगर सख्ती करे तो पालक विरोध करने लगते हैं। लेकिन कहीं किसी से तो चूक हो रही है, तभी आने वाली पीढ़ी इस कदर हादसों का शिकार हो रही है। किसी को तो इसकी जिम्मेदारी उठानी होगी।






