पंचायत स्तर पर तय होगा फसल बीमा
Source: गोविंद पटेल | Last Updated 03:33(05/02/12)
रायपुर। राज्य सरकार किसानों को बड़ी राहत देते हुए फसल बीमा के आकलन का आधार बदलने जा रही है। नुकसान का आकलन अब तहसील के बजाय पंचायतों की औसत पैदावार के आधार पर होगा। इससे हर गांव और पंचायत में फसल कम होने पर किसानों को क्षतिपूर्ति मिल सकेगी।
पहले तहसील में 200 से 300 गांव होने के कारण किसानों को फसल बीमा का पर्याप्त लाभ नहीं मिल पाता था। पंचायत स्तर पर बीमा का आकलन करने की घोषणा आगामी बजट में होने की उम्मीद है। पहले 149 तहसीलों के आधार पर फसल बीमा के लिए अधिसूचना जारी होती थी। संशोधन के बाद इसकी सीमा 9820 पंचायतों हो जाएगी। इसका बीमा राष्ट्रीय कृषि मौसम बीमा निगम करेगी।
राज्य शासन को फसल कटाई प्रयोग के लिए पटवारी, कृषि अधिकारी और सांख्यिकी अधिकारियों की जरूरत पड़ेगी। इसके लिए रिटायर्ड अधिकारियों की भी मदद ली जाएगी। पहले पटवारी हल्का को आधार मानने की मांग उठ रही थी, लेकिन सरकार इसे और छोटा करना चाहती है। मध्यप्रदेश में पटवारी हल्का के आधार पर फसल बीमा का आकलन किया जाता है।
48 लाख हेक्टेयर है रकबा
32 लाख से अधिक किसान
149 तहसील
9,820 पंचायतें
ऐसे होगा आकलन
पटवारी, कृषि विभाग के अधिकारी और सांख्यिकी अधिकारी फसलों का औसत उत्पादन निकालने के लिए फसल कटाई प्रयोग करते हैं। पहले इसे 200 से 300 गांवों के बीच तीन-चार सैंपल में किया जाता था। अब इसे हर पंचायत (यानी 1-2 गांव) में किया जाएगा। फसल कटाई प्रयोग छोटा होने से औसत उत्पादन के आंकड़े शुद्ध और बेहतर आ सकेंगे। इसके आधार पर क्षतिपूर्ति तय की जाएगी।
क्यों था जरूरी
ञ्च खंड वर्षा के कारण एक गांव में बारिश होती है, दूसरे में नहीं
ञ्च सिंचित क्षेत्र में औसत उत्पादन ज्यादा आता है।
ञ्च तहसील का क्षेत्रफल ज्यादा बड़ा होता है।
ञ्च औसत उत्पादन में आ जाता था अंतर।
ञ्च किसानों को नहीं मिल पाता था मुआवजा।
ञ्च बीमा क्लेम राशि कम होती थी।
किसानों को होगा फायदा
तहसील आधार पर फसल बीमा का लाभ किसानों को नहीं मिल पाता था, इसलिए संशोधन कर इसे हर पंचायत के आधार पर किया जाएगा। इससे किसानों को बीमा क्लेम ज्यादा मिल सकेगा।
चंद्रशेखर साहू, कृषि मंत्री