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मिट्टीतेल अपने साथ लेकर आई थी फोर्स और लगा दी थी घरों में आग
भास्कर न्यूज
| Jan 19, 2013, 07:02AM IST

जगदलपुर। टीएमटीडी आयोग की सुनवाई के दौरान आए मोरपल्ली के ग्रामीणों ने स्पष्ट तौर पर कहा कि उनके गांव में पुलिस ने आग लगाई है। हालांकि किसी भी ग्रामीण ने अपनी गवाही में आयोग को यह नहीं बताया कि उसने स्वयं आग लगाते देखा है।
12 मार्च 2011 को हुई आगजनी में पीड़ितों को गवाही के लिए बुलाने में चौथी कोशिश कामयाब रही है। मोरपल्ली, तिम्मापुरम और ताड़मेटला के ग्रामीण जिनमें महिलाएं और बुजुर्ग भी थे, गुरुवार की शाम ही यहां पहुंच गए थे।
जांच आयोग के सामने सबसे पहले मोरपल्ली के सोड़ी मुता की गवाही दर्ज की गई। इसके बाद नुप्पा हुंगा, सोड़ी बोज्जा, गोप्पो मुता, कुंजाम पोदिया, हेमला सोमा, मड़कम भीमा और माड़वी नंदा के साक्ष्य दर्ज किए गए।
आयोग के सामने पेश होने वाले गवाहों में माड़वी नंदा ही एकमात्र गवाह था, जो पढ़ा-लिखा है। वह सातवीं तक पढ़ा है। नंदा ने आयोग को बताया कि घटनावाले दिन सुबह परिवार और गांववालों के साथ वह खेत की ओर बूटा कटाई के लिए गया हुआ था। जब लौटा तो गांव में शोर हो रहा था। इसके बाद वह जंगल की ओर भाग खड़ा हुआ।
शाम को सब कुछ शांत होने के बाद वापस आया तो देखा कि उसका घर और उसमें रखा सामान जल चुका था। उसने बताया कि माड़वी गंगा उसका बड़ा भाई है। पुलिस उसे मारते-पीटते अपने साथ ले गई थी। उसे अगले दिन थाने से गांव वाले लेकर आए। गंगा ने ही सबको बताया कि पुलिस व एसपीओ ने उनके घरों को जलाया है। नंदा के अलावा मोरपल्ली के अन्य गवाहों ने भी एक ही बात को दोहराया है। कुछ लोग गांव में भी रह गए होंगे यह उन्हें नहीं मालूम। बाद में लौटे तो गांव में पुलिस थी, शोर सुनकर वे सभी जंगल की ओर भाग गए थे। पुलिस के जाने के बाद लौटे तो देखा उनके घर जले हुए थे।
मिट्टीतेल अपने साथ लेकर आई थी फोर्स
टीएमटीडी आयोग के सामने पहले दिन मोरपल्ली के सभी 21 ग्रामीणों की गवाही हो गई। सबसे आखिरी में माड़वी गंगा का साक्ष्य दर्ज किया गया। गंगा ने स्पष्ट तौर पर कहा कि फोर्स ने बूटा कटाई के दौरान उसे पकड़ लिया था और उसकी बेदम पिटाई की थी। पुलिस वालों ने उसके सामने ही लोगों के घरों में आग लगाई है। वे अपने साथ बोतल में मिट्टी का तेल लाए थे। उसे चिंतलनार चौकी ले जाया गया था, अगले दिन घर वाले उसे छुड़ाकर लाए। उसने इस बात से इंकार किया कि आगजनी करने वाले नक्सली थे। उसका कहना था कि यदि वे नक्सली होते तो उसे साथ लेकर चिंतलनार क्यों आते? आयोग के सामने मोरपल्ली के 21, ताड़मेटला के 24 और तिम्मापुरम के 7 ग्रामीण गवाही देने आए थे।






