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स्कूलों को हर गरीब छात्र का पैसा नहीं मिलेगा
भास्कर न्यूज | Feb 23, 2013, 06:59AM IST

रायपुर। बिना नोडल अधिकारी की मंजूरी या अनुशंसा के गरीब बच्चों को अपने स्कूलों में शिक्षा के अधिकार कानून के तहत प्रवेश देने वाले स्कूलों की मुसीबत हो सकती है। ऐसे प्रवेश के लिए सरकार उनको फीस की क्षतिपूर्ति राशि नहीं देने वाली। स्कूल शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि वह केवल उन्हीं बच्चों के लिए क्षतिपूर्ति राशि देगा, जिनका उसके माध्यम से एडमिशन हुआ है।
गौरतलब है कि कई स्कूलों ने शासन से अनुमति के बिना ही बीपीएल कार्डधारी बच्चों को अपने यहां प्रवेश देने के बाद उनकी फीस की राशि का दावा किया है। क्षतिपूर्ति के लिए सैकड़ों निजी स्कूलों के आवेदन पत्र राज्य स्कूली शिक्षा विभाग को मिले हैं। इन सारे आवेदनों का विभाग की टीम सत्यापन करेगी।
शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) के तहत आरक्षित 25 फीसदी सीटों पर गरीब बच्चों का निजी स्कूलों में दाखिला देने का सिलसिला 2010 से शुरू हुआ था। तीन सालों में कई स्कूलों ने गरीब बच्चों को दाखिला दिया। इस अभियान के दौरान ऐसी शिकायतें भी मिली हैं कि कई स्कूलों ने बिना मापदंड के ही बच्चों को दाखिला दे दिया।
मुफ्त शिक्षा देने के एवज में अब निजी स्कूलों को इन छात्रों की फीस के पैसे बंटने हैं। ऐसे में स्कूलांे की सूची खंगाली जा रही है। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के अधिकारियों का कहना है स्कूलों से सूची मंगाई जा रही है।
सूची के सत्यापन में खरे उतरने वाले स्कूलों को ही इसका लाभ मिलेगा। इससे पहले शुरुआत में ही यह तय कर दिया गया था कि शिक्षा का अधिकार के तहत निजी स्कूलों में आरक्षित 25 फीसदी सीटों पर उस क्षेत्र के नोडल अफसरों के माध्यम दाखिला होगा। इसके लिए पालक नोडल अधिकारी के पास ही आवेदन करेंगे। जिन स्कूलों में नोडल अफसरों से बिना कोई जानकारी के दाखिला दिया गया होगा उन स्कूलों को इसका लाभ नहीं मिलेगा।
गौरतलब है कि शासन की ओर से गरीब बच्चों को पढ़ाने के लिए कुछ महीने पहले फीस तय की है। इसके मुताबिक प्राइमरी के बच्चों के लिए 7,500 रुपए और मिडिल के बच्चों के लिए 11,400 रुपए प्रति छात्र स्कूलों को मिलेंगे। प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी एएन बंजारा का कहना है कि नोडल अफसरों से सत्यापित की गई गरीब बच्चों की सूची के आधार पर ही स्कूलों को पैसा दिया जाएगा।
तीन साल के पैसे मिलेंगे
अधिकारियों ने बताया कि तीन साल से गरीब बच्चों का दाखिला निजी स्कूलों में आरक्षित सीटों पर हो रहा है। तीनों सालों के पैसे स्कूलों को दिए जाएंगे। इसके तहत 2010-11 में कुल 212 बच्चों, 2011-12 में 1304 और 2012-13 में 1373 बच्चों को प्राइमरी व मिडिल स्कूलों में दाखिला दिलाया गया था। इन बच्चों के लिए शासन की ओर से करीब 2.10 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं।






