हफ़्तों तक शांत बैठे नक्सालियों का सुकमा बड़ा हमला
Source: dainik bhaskar news | Last Updated 03:19(10/02/12)
जगदलपुर/सुकमा/रायपुर कई हफ्तों से शांत बैठे नक्सलियों ने गुरुवार की शाम सुकमा के पास बड़ा हमला किया। पोलमपल्ली से लौट रही पुलिस पार्टी की स्कॉर्पियो गाड़ी को बारूदी सुरंग से उड़ाने की कोशिश के बाद नक्सलियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग की।
गोलीबारी में कोया कमांडर करतम सूर्या और ड्राइवर सोनवानी की मौत हो गई, जबकि एडिशनल एसपी डीएस मरावी समेत चार घायल हैं। सुकमा इलाके में नक्सलियों के खिलाफ सालों से लड़ रही पुलिस के लिए सूर्या की मौत बड़ा झटका है। कोया आदिवासियों को कोया कमांडो के रूप में संगठित करने का श्रेय सूर्या को ही दिया जाता है।
रात करीब साढ़े दस बजे दोरनापाल सलवा जुड़ूम शिविर पर नक्सलियों ने फिर फायरिंग की। जवानों की जवाबी कार्रवाई में वे 20 मिनट बाद ही भाग गए। स्वामी अग्निवेश पर पिछले साल 26 मार्च को दोरनापाल में हुए हमले की जांच करने के लिए सीआईडी की टीम एसपी संदीप मौर्य के नेतृत्व में सुकमा आई हुई है। टीम ने कई लोगों को बयान के लिए बुलाया था। हमले के समय सुकमा में पदस्थ रहे एडिशनल एसपी डीएस मरावी व एसडीओ तारकेश्वर पटेल भी दोरनापाल आए हुए थे।
घात लगाकर पुलिया के पास हमला
दोपहर को मरावी अपनी स्कॉर्पियो से सूर्या के साथ एक अन्य कोया कमांडर किच्चे नंदा और दोरनापाल की घटना में शामिल कुछ लोगों से मिलने के लिए पोलमपल्ली गए थे। दोरनापाल से पोलमपल्ली के बीच 12 किलोमीटर का अंतर है। इसकी खबर नक्सलियों को मिल गई। पोलमपल्ली से चार किमी दूर गोगुंडा के पास नक्सली घात लगाकर बैठ गए। शाम करीब 5.20 बजे पुलिया के पास पहुंचते ही स्कॉर्पियों को नक्सलियों ने बारूदी सुरंग विस्फोट से उड़ाने की नाकाम कोशिश की। टाइमिंग चूक जाने के बाद उन्होंने फायरिंग शुरू कर दी। सूर्या और वाहन चालक की मौके पर ही मौत हो गई। नक्सलियों की गोली मरावी के हाथ को छूते हुए निकली। मरावी, नंदा और अन्य लोग जवाबी फायरिंग करते हुए जंगल की तरफ भागे। एडिशनल डीजी नक्सल ऑपरेशन रामनिवास ने हमले में सूर्या और सोनवानी के शहीद होने की पुष्टि की है। मालूम हो कि सूर्या को कुछ साल पहले नक्सलियों ने अगवा भी कर लिया था।
हमले में कई बार बचे हैं मरावी
एएसपी मरावी वर्ष 2010 में दंतेवाड़ा में गोरखा के पास सीआरपीएफ कैंप के लिए जगह तैयार करने के दौरान बारूदी विस्फोट का शिकार हो गए थे। वे कई मुठभेड़ में भी शामिल रहे। दोरनापाल में हमले के बाद स्वामी अग्निवेश को मरावी ने ही सुरक्षित सुकमा तक पहुंचाया था।मरावी इस समय बोरगांव पुलिस ट्रेनिंग स्कूल के कमांडेंट हैं।
नंदा भी पहले था सूर्या ग्रुप में: घायल किच्चे नंदा भी पहले सूर्या ग्रुप में था बाद में वह पोलमपल्ली तैनाती के बाद से एक अलग दस्ते की अगुवाई कर रहा था। नंदा इससे पहले भी मुठभेड़ में जख्मी हो चुका है।
माओवादियों के लिए खौफ था सूर्या
शहीद करतम सूर्या दक्षिण बस्तर में माओवादियों के लिए खौफ का पर्याय माना जाता था। उनकी हिटलिस्ट में सबसे ऊपर उसी का नाम था। ‘सूर्या ग्रुप’ कोया कमांडो की सबसे बड़ी टुकड़ी है, जिसमें 100 से अधिक लड़ाके हैं। इस ग्रुप ने अब तक 30 से अधिक माओवादियों को मारा है। २७ वर्षीय सूर्या को 2007 में बस्तर टायगर के साथ ही मां दंतेश्वरी शौर्य पदक से नवाजा गया था। सूर्या जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रीय राइफल्स और आंध्रप्रदेश की एंटी नक्सल टीम ग्रे-हाउंड के साथ ट्रेंनिग ले चुके हैं।