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पूरी प्लानिंग के बाद की खुदकुशी, चिवड़ा दही खाकर रहती थीं प्रोफेसर बहनें
Bhaskar news
| May 20, 2012, 01:24AM IST

रविवार को सुबह 11 बजे उनकी मौत का खुलासा होने के बाद पुलिस के साथ दैनिक भास्कर की टीम भी बंगले में गयी। प्रोफेसर बहनों का मकान पॉश इलाके में है। बंगले के ठीक सामने मंत्री निवास है। बंगला लगभग दो हजार वर्गफुट से ज्यादा जमीन पर बना है। आलीशान बंगले की कीमत करोड़ों में होने का अनुमान है।
बंगले के भीतर फर्नीचर और बाकी सामान बेहद कीमती है। किचन खूबसूरत है लेकिन ऐसा लगा रहा था जैसे अर्से से यहां चूल्हा नहीं जला है। दैनिक भास्कर की पड़ताल में पता चला है कि दोनों बहनें अक्सर पड़ोस की होटल से चिवड़ा व दूध लाकर उसी का भोजन करती थीं। उन्हें कभी-कभी मिठाई भी ले जाते देखा गया।
वे 15 साल पहले रिटायर हुई थीं। शुरू-शुरू में कालेज के अधिकारी-कर्मचारी आते थे। धीरे-धीरे उनका आना बंद हो गया। आस-पास के लोगों से भी दोनों का संपर्क नहीं था। कुम्हारी का ड्राइवर मोहम्मद अहमद ही महीने में एक-दो बार आता था। लोग कभी-कभी बड़ी बहन वंदना को घर की सफाई करते देखते थे। उन्होंने मुक्ति श्रद्धांजलि संस्था को डेढ़ लाख का दान दीवार बनाने के लिए दिया था। चैरिटेबल अस्पताल के लिए उन्होंने एंबुलेंस दान की थी। उनके शव आंबेडकर अस्पताल के चीरघर में रखे गए हैं। कोलकाता में रहने वाले परिजनों को सूचना दे दी गई है।
मौत भी जुदा नहीं कर सकी
दोनों बहनों को मौत भी जुदा नहीं कर सकी। उनकी लाशें एक ही कमरे में आजू-बाजू पड़ी मिलीं। तीन दिन से उनके बंगले का दरवाजा नहीं खुला था लेकिन आजू-बाजू रहने वाले किसी को भी खबर नहीं हुई। बंगले के दरवाजे खिड़कियां पूरी तरह से बंद थे। इस वजह से लाशें सड़ने की दरुगध भी बाहर नहीं आ पा रही थी।
सुसाइडल नोट में क्या
सुसाइडल नोट में प्रोफेसर बहनों ने केवल इतना लिखा है कि वे अपनी बीमारी से परेशान हो चुकी हैं। उन्होंने अपनी वसीयत वकील के पास छोड़ दी है। उसे स्वीकार करते हुए अमल किया जाए। घर का सारा सामान करीने से रखा था। जेवरों को भी उन्होंने सजाकर रखा था। इससे यह माना जा रहा है कि उन्होंने पूरी प्लानिंग करने के बाद खुदकुशी की। मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने उनकी मौत पर संवेदना जाहिर की है।





