सोमवार को स्थानीय भवानीपाटना केंद्रीय सहकारी बैंक (बीसीसीबी) में पास के गांव डूमरपानी का एक 80 वर्षीय बुजुर्ग किसान मानसिंह माझी धान का चुकारा लेने पहुंचा था। उसके पास 4500 रुपए का चेक था। परंतु बैंक ने उसे 45 हजार का भुगतान कर दिया। दस-दस के नोट के 45 बंडल देख कर वह घबरा गया। उसे इतना मासूम था कि उसे समझ ही नहीं आया कि इतने सारे रुपए उसे क्यों दिए गए।
वह पूरे रुपए लेकर बैंक की बगल में स्थित मोती क्लाथ स्टोर पहुंचा और दुकानदार गोलू को पूरी बात बताई और रुपए भी दिखाए। गोलू ने उसका पासबुक देखा तो सारा माजरा समझ में आ गया। गोलू उसे दुकान में छोड़ कर बैंक को सूचित करने पहुंचा। हैरत की बात है कि बैंक अधिकारियों ने उसका आभार प्रकट करने की बजाए उससे कहा कि वो बाहर नहीं जाएंगे, रुपए यहीं बैंक में लाकर वापस करो।
गोलू के साथ मानसिंह माझी सारे रुपए लेकर बैंक पहुंचा तब बैंक ने उसके 4500 रुपए देकर बाकी के रुपए अपने पास रखे। मानसिंह ने बड़े भोलेपन से कहा, ‘इत्ते सारे पैसे देख कर मैं घबरा गया था। मुझे समझ ही नहीं आया कि आखिर इत्ते सारे पैसे मुझे क्यों दिए गए थे’। बहरहाल, बैंक को उस भोले भाले बुजुर्ग का शुक्रिया अदा करना चाहिए था क्योंकि दस्तावेजों में तो बैंक ने 4500 का ही भुगतान किया था। वो तो कैशियर ने भूल से 45 हजार उसे दे दिए थे।
गौरतलब है कि धान का चुकारा लेने के लिए इन दिनों बीसीसीबी में किसानों की रोजाना भारी भीड़ उमड़ती है। माना जा रहा है कि भीड़ के चलते कैशियर ने भूल से ज्यादा पेमेंट कर दिया होगा। यह भी कहा जा रहा है कि यदि उक्त किसान ईमानदारी नहीं दिखाता तो बैंक कर्मचारी को संभवत: जेब से रुपए भरने पड़ते।
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