रायपुर। राजधानी में विकास कार्यो को लेकर नेताओं के बीच बयानों की जंग तेज हो गई है। सांसद रमेश बैस के घर हुई भाजपा मंत्रियों, नेताओं की बैठक के बाद महापौर किरणमयी नायक के तीखे हमलों के बाद राजधानी के विधायक और नगरीय प्रशासन मंत्री राजेश मूणत ने भी पलटवार किया। मूणत ने महापौर पर झूठ बोलने और लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि शहर के विकास में राजनीति कौन कर रहा है, इसके लिए वह किसी भी मंच पर बहस के लिए तैयार हैं। रही बात पसंद के ठेकेदार को काम दिलाने के आरोप की, तो महापौर इसे साबित करके दिखाएं। वह मंत्री का पद तो क्या राजनीति ही छोड़ देंगे। उन्होंने कहा कि महापौर अपनी हर नाकामी को राज्य शासन के पाले में डालने की कोशिश कर रही हैं, यह गलत है।
बैस के घर हुई बैठक में शहर के विकास को लेकर लंबी चर्चा हुई थी। उसके बाद से मामला गरमा गया है। महापौर ने कल के बयान को लेकर भास्कर ने बुधवार को राजेश मूणत से बात की। राजेश मूणत ने साफ कहा- शहर के विकास की चिंता की बात करने वाली महापौर ये बताएं कि पूरे पैसे मिलने के बावजूद दो साल बाद भी सौ सिटी बसें क्यों नहीं खरीदी जा सकीं।
बहुमंजिला इमारतों के लिए हाइड्रोलिक फायर टेंडर के लिए आज वह हायतौबा मचा रही हैं। पर दो साल तक जब उनके पास पैसा पड़ा रहा, तो उन्होंने इस बारे में क्यों कुछ नहीं किया। खुद उन्होंने विभागीय बैठकों में तीन बार महापौर से इस बारे में जानकारी मांगी थी। खरीदी में देरी होती देखकर ही उन्होंने पैसा वापस ले लिया, क्योंकि अगर निगम जनता के प्रति किसी जवाबदेही को पूरा नहीं करता, तो उसकी निगरानी करने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है। मैं अगर शहर या निगम का अहित चाहता तो महापौर के वित्तीय अधिकार की सीमा को एक से बढ़ाकर पांच करोड़ क्यों करता।
मेरा दावा है कि बीते दो साल के अंदर रायपुर नगर निगम को जितना पैसा विकास के लिए दिया गया है, उतना पिछले 10 सालों में कभी नहीं मिला। इसके बावजूद महापौर काम नहीं कर पा रहीं, शहर के लोगों को विकास नहीं दिख रहा, तो इसका दोषी किसे माना जाए। भाजपा के महापौर सुनील सोनी के कार्यकाल में पीने के पानी की सप्लाई का खर्च एक करोड़ था, वह तीन से पांच करोड़ रुपए हो गया है। महापौर होने के नाते इस बात की चिंता महापौर को करनी चाहिए। कार्यभार संभालने के बाद महापौर झाड़ू लेकर वार्डो में घूमी थीं। आज सफाई का क्या हाल है, सबके सामने है।
विकास के लिए दिए गए पैसों का क्या इस्तेमाल किया, यह पूछना मंत्री होने या राज्य शासन का प्रतिनिधि होने के नाते मेरी जवाबदारी है। दो साल में नगर निगम में आयुक्त को तीन बार बदले जाने की बात है, तो यह काम अकेले रायपुर निगम में नहीं हुआ। अंबिकापुर, कोरिया, चिरमिरी में हमारी पार्टी का पदाधिकारी है। वहां भी अधिकारी बदले गए हैं। यहां तक कि मुख्यमंत्री के क्षेत्र राजनांदगांव में दो साल के अंदर तीन बार आयुक्त को बदला गया। यह प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा है। राजनीतिक विद्वेष की कार्रवाई नहीं।