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छत्तीसगढ़ को छोड़ दूसरे राज्यों में सरेंडर कर रहे नक्सली

सुदीप त्रिपाठी | Jul 14, 2012, 04:33AM IST
 
 


रायपुर।छत्तीसगढ़ में खूनी खेल खेलने वाले नक्सली मुआवजे के लालच में दूसरे राज्यों में सरेंडर कर रहे हैं। पिछले दो सालों में 100 से ज्यादा नक्सलियों ने ओडिशा और आंध्र प्रदेश में सरेंडर किया है। आंध्र प्रदेश में सरेंडर करने वालों की संख्या ज्यादा है। दरअसल, वहां नक्सली को सरेंडर पर बढ़िया मुआवजा और नौकरी तक दी जाती है। आंध्रा की पुनर्वास नीति ही नक्सलियों को सरेंडर करने के लिए लुभा रही है। प्रदेश में आकर्षक व प्रभावी नीति न होने के पिछले 10 साल में एक भी बड़े नक्सली ने यहां सरेंडर नहीं किया है।
 
भास्कर की जांच में पता चला है कि आंध्र प्रदेश हैदराबाद में सप्ताहभर पहले 36 नक्सलियों ने समर्पण किया किया। इसमें 17 नक्सली छत्तीसगढ़ के बस्तर डिवीजन में सक्रिय थे। पड़ताल में यह भी सामने आया है कि नक्सलियों को छत्तीसगढ़ की तुलना में वहां मुआवजे की दोगुनी राशि दी गई। नौकरी के अलावा बेहतर पुनर्वास होगा। नक्सली खेमों में आंध्र प्रदेश सरकार की नीति की खासी चर्चा है। पिछले 10 सालों का रिकार्ड खंगालने पर पता चला कि अब तक छत्तीसगढ़ में 2,632 नक्सलियों ने समर्पण किए। इनमें एक भी बड़ा नक्सली शामिल नहीं है। समर्पण करने वालों में ज्यादातर संघम सदस्य ही हैं। अब तक जितने नक्सलियों ने सरेंडर किया है। उनमें कुल 146 नक्सलियों को ही यहां नौकरी मिल पाई। बाकी में कुछ को जमीन दी गई और कुछ को नगर निगम, वन विभाग में दैनिक वेतनभोगी और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर ही नियुक्ति मिल पायी है।
 
छत्तीसगढ़ में 10 साल में एक भी बड़े नक्सली ने नहीं किया है आत्मसमर्पण
राज्य में हथियारों के हिसाब से सरेंडर की कीमत

एलएमजी के साथ 4.50 लाख

एके-47 के साथ 3 लाख

एसएलआर के साथ 1.50 लाख

थ्री नॉट थ्री के साथ 75 हजार 12

बोर बंदूक के साथ 30 हजार
 
 
दूसरे राज्यों में ये सुविधाएं -
आंध्रप्रदेश और ओडिशा जैसे राज्यों में सरेंडर के दौरान ही मुआवजे की राशि प्रदान की जाती है।
- पुनर्वास नीति के तहत उन्हें तत्काल मकान या नौकरी का आश्वासन देकर ज्वाइन कराया जाता है।
- गिरफ्तारी या एनकाउंटर का खतरा नहीं रहता। इससे नक्सली दूसरे राज्यों में खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं।
 
 
किस नक्सली पर अभी कितना इनाम
सेंट्रल कमेटी का सचिव 12 लाख
सेंट्रल मिल्रिटी कमिशन प्रमुख 10 लाख
पोलित ब्यूरो सदस्य 7 लाख
स्टेट कमेटी सदस्य 3 लाख
पब्लिकेशन कमेटी के सदस्य 2 लाख
एरिया कमेटी सचिव 1.5 लाख
अन्य एरिया कमेटी सचिव 1 लाख
एलओसी कमांडर 50 हजार
2004 के बाद नहीं बढ़ाई मुआवजा राशि
प्रदेश में वर्ष 2004 के बाद से अब तक सरेंडर की मुआवजा राशि नहीं बढ़ाई गई। नक्सलियों के ईनाम की राशि में भी बदलाव नहीं हुआ। ईनाम की राशि में बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव भेजा गया है। अफसरों के मुताबिक नक्सली आमतौर पर पैसों की तंगी और गिरफ्तारी के डर से सरेंडर करते हैं। उन्हें जब अपने परिवार का भविष्य अंधकारमय नजर आने लगता है तो वे हथियार डाल देते हैं।
प्रस्ताव भेज दिया है..

प्रदेश में मुआवजा की राशि दूसरे राज्यों की अपेक्षा बेहद कम है। 2004 के बाद से इसमें संशोधन नहीं हुआ। मुख्यालय की ओर से गृह विभाग को यह राशि बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा गया है। इस पर सरकार फैसला लेगी।ञ्जञ्ज राम निवास एडीजी, नक्सल ऑपरेशन

 
 
 

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