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नायाब नमूना है विवेकानंद की ये प्रतिमा, लिम्का बुक में हुआ दर्ज
bhaskar news | Feb 03, 2012, 02:05AM IST
लिम्का बुक ऑफ रिकार्डस ने 2012 के संस्करण में पेज 176 पर इस रिकार्ड को ‘लार्जेस्ट मॉडल फॉर ए स्टेच्यू’ के तौर पर दर्ज किया है। नेलसन भिलाई के सेक्टर-1 में रहते हैं और इसी सेक्टर में निवासरत छत्तीसगढ़ की एक और हस्ती पद्म भूषण तीजन बाई को लिम्का बुक ने पर्सन ऑफ द ईयर के तौर पर आशा भोसले, गुलजार और पं. भीमसेन जोशी के साथ अपने नए संस्करण में दर्ज किया है। नेलसन का कहना है कि 2004 में प्रतिमा का काम शुरू किया था तो उस वक्त अंदाजा नहीं था कि इसे 37 फीट तक ऊंची बनाएंगे।
कीर्तिमान बताने 7 साल इंतजार करना पड़ा : 2005 में लोकार्पण के दौरान विवेकानंद आश्रम रायपुर के सचिव स्वामी सत्यरूपा नंद ने अपने कनाडा मुख्यालय से पता करने के बाद घोषित किया था कि विश्व में स्वामी विवेकानंद की बैठे हुए मुद्रा में इससे ऊंची प्रतिमा नहीं है। तब किसी को भी ध्यान नहीं आया कि कीर्तिमान के तौर पर इसे दर्ज कराया जा सकता है।
कानपुर के शिशिर मिश्रा ने इंटरनेट पर जब इस प्रतिमा के बारे में देखा तो उन्होंने नेलसन से संपर्क किया और शुरू हुई दावेदारी की कोशिश। पहली कामयाबी लिम्का बुक ऑफ रिकार्डस (भारतीय) के 2012 में दर्ज होने के साथ मिली है। इसे गिनीज बुक में विश्व कीर्तिमान के तौर पर भी भेजा जा रहा है।
कानपुर के शिशिर मिश्रा ने ‘भास्कर’ से कहा कि नेलसन जैसे कलाकार देश की धरोहर हैं और उनकी बनाई प्रतिमा के नाम कीर्तिमान दर्ज हो गया तो यह मेरे अकेले की नहीं समस्त छत्तीसगढ़ वासियों की भी सफलता है।
* खासियत : स्वामी विवेकानंद ध्यान मुद्रा में
* लोकार्पण : 16.4. 2005, पूर्व प्रधानमंत्री बाजपेयी के हाथों
* ऊंचाई 37 फीट पैडेस्टल सहित : पद्मश्री नेलसन के नेतृत्व में 50 मजदूर और 5 कलाकारों की टीम ने बनाया
* निर्माण : नेलसन कला गृह सेक्टर-1, नंदिनी (बागडूमर)
* क्ले मॉडल के बाद प्लास्टर ऑफ पेरिस में ढाल कर प्रतिमा रायपुर भेजी गई
* बूढ़ा तालाब में कास्टिंग की प्रक्रिया पूरी की गई
* प्रतिमा निर्माण की अवधि एक साल





