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फोटो ब्लॉग: छत्तीसगढ़ में...
रायपुर। आर्कियोलॉजी पर चल रहे सेमिनार में के दूसरे दिन अनेक वक्ताओं ने अपने पेपर पेश किए। दो सत्रों में हुए इस कार्यक्रम में लगभग 20 वक्ताओं ने भाग लिया। महंत घासीदास संग्रहालय में चल रहे इस कार्यक्रम का आयोजन छत्तीसगढ़ संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग की ओर से किया जा रहा है। मंगलवार को हुए पहले सत्र में सिरपुर से आए डॉ. एके शर्मा की अध्यक्षता में वक्ताओं ने पेपर पेश किए। इसका मुख्य विषय छत्तीसगढ़ की नदी घाटी सभ्यता और नवीन अन्वेषित पुरासंपदा रखा गया है। इसमें दिल्ली, मुंबई, चंडीगढ़, कोलकाता, गुजरात, जम्मू, लद्दाख समेत कई जगहों से विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं।
छत्तीसगढ़ को नदियों का राज्य कहा जाता है। अंतरराज्यीय नदियां तो अपेक्षाकृत कम हैं, किंतु राज्य में बहने वाली सैकड़ों किमी की जीवनदायिनी नदियां हैं। विभिन्न देश कालों में शासकों ने कई पुरासंपदाओं को नदियों में भी प्रवाहित किया है, ऐसे में अंडर वाटर एक्सेवेशन छत्तीसगढ़ में भी नए इतिहास की खोज का बिंदु हो सकता है। पेपर प्रजेंटेशन में सबसे हटकर बस्तर में मिली मूर्तियों पर प्रजेंटेशन दिया गया।
स्त्रियों की आर्थिक साझेदारी
समाज में आर्थिक जिम्मा पुरुषों का ही नहीं रहा, बल्कि स्त्रियों ने भी अपनी साझेदारी दिखाई है। यह कहका है गरिमा कौशिक का शोध, जो चंडीगढ़ से आई हैं। उन्होंने जेंडर आर्कियोलॉजी पर पेपर पेश किया। इसमें महिलाओं और पुरुषों का भी अनुपात पता चला। इसी दौरान अक्षत कौशिक ने भी सिखों के मूल स्वरूप पर पेपर प्रजेंट किया। कपूरथला से नाभा तक के अध्ययन के मुताबिक सिखों को मुगल और अंग्रेजी रवायत का मिश्रण माना जा सकता है।
लद्दाख में बौद्ध गए हैं बिहार से
लद्दाख से पेपर पेश करने आईं सोनम स्पाजिन बैंककोलोक ने बताया कि आमतौर पर वेस्टर्न रिसर्चर्स कहते हैं बौद्ध तिब्बत से लद्दाख आए। मेरे शोध के मुताबिक बौद्ध तिब्बत भारत से ही गए हैं, जबकि लद्दाख में यह जम्मू से गए हैं।
ओडिसा बिहार में एक से बौद्ध
रायगढ़ के रहने वाले कोलकाता से पेपर प्रजेंट करने आए डॉ. सुभाष खामारी ने बताया कि ओडिसा में भी बौद्ध धर्म के कई रोचक अवशेष मिले हैं। इनसे साबित होता है कि यहां पर भी बौद्ध बिहार के बराबर ही रहे हैं।
हो सकते हैं भग्नावशेष
दिल्ली के डॉ. शिशिर जैन ने बताया कि जैनों के पुरुलिया जिले में जैन र्तीथकरों में से कुछ मूर्तियां मिली हैं। छत्तीसगढ़ में भी अगर खोज की जाएगी तो सिरपुर के अलावा भी कई जगहों पर जैन भग्नावशेष मिल सकते हैं।
बस्तर में मिली स्त्री-अश्व की अद्भुत मूर्ति
सेमिनार में पेपर प्रजेंटेशन देते हुए डॉ. राम विजय शर्मा ने बताया कि बस्तर में एक मूर्ति मिली है। इसका शास्त्रों या धार्मिक ग्रंथों में तो कोई ज्यादा जिक्र नजर नहीं आता। इसमें धड़ स्त्री का और सिर घोड़े का है। यहां के ग्रामीण इसे धार्मिक नजरिए से देखते हैं, यही कारण है कि सालों बाद भी यह यथावत् संरक्षित है। यहां पर गुदमांचल की दुर्लभ और अद्भुत मूर्तियां भी हैं। इसी क्षेत्र में एक मूर्ति ऐसी भी है जिसका धड़ सांप का और चेहरा ी का है। यह सकनापल्ली में संरक्षित है।
सिक्कों ने कही जम्मू की कहानी
सेमिनार के पहले सत्र में जम्मू से आईं डॉ. सोनिया जस्नोटिया ने सिक्कों के सिंक्रॉनाइजेशन पर पेपर पेश किया। उन्होंने बताया कि जम्मू के म्यूजियम में वर्षो से कई देशकाल के सिक्के रखे थे, उन्हें एक शोध के माध्यम से देश, काल और शासन में विभाजित करके इतिहास के रोचक तथ्यों का रास्ता खुला है। इनमें सर्वाधिक कम पाए जाने वाले सिक्कों में राजा प्रताप, राजा नामविकाया और विनयादित्या के सिक्के रहे। इन सिक्कों से हम जम्मू की 5वीं सदी तक की यात्रा कर सकते हैं।