दांत उखाड़ने भर को है डेंटल कॉलेज
Source: मोहम्मद निजाम | Last Updated 03:36(09/02/12)
रायपुर. शासकीय डेंटल कालेज में पूरा सिस्टम छह माह से ठप पड़ा है। इलाज के नाम दांत उखाड़ने के अलावा डाक्टर कुछ नहीं रहे हैं। दर्द निवारक टेबलेट और इंजेक्शन तो दूर यहां सर्जरी करने के बाद सिलाई करने के लिए धागा तक नहीं है। पूरा सामान और दवाएं मरीजों को मंगवाई जा रही है। कालेज के जिम्मेदार अफसर आंख मूंदे बैठे हैं।
दैनिक भास्कर की टीम ने मंगलवार और बुधवार को डेंटल कालेज में कुछ घंटे गुजारे। जूनियर डाक्टरों और इलाज के लिए भटकते मरीजों से चर्चा की। इस दौरान आलीशान नजर आने वाले डेंटल कालेज के भीतर की अव्यवस्था सामने आई।
कालेज में मशीन और उपकरण भरे पड़े हैं, लेकिन ज्यादातर बंद हैं। 40 डेंटल चेयर में केवल तीन चेयर ही ऐसी है, जिसके इलेक्ट्रानिक सिस्टम पूरी तरह से काम कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में दांतों की सफाई से लेकर सर्जरी तक के लिए मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है।
तीन मशीन होने के कारण हर कोई वहीं कतार लगाकर खड़ा हो जाता है। अस्पताल में सर्जरी के बाद मुंह के अंदरूनी हिस्से की सिलाई के लिए धागा तक नहीं है। मरीजों को पर्ची बनाकर धागा मेडिकल स्टोर्स से मंगवाया जा रहा है। मुफ्त इलाज करवाने के लिए आने वाले मरीजों को दो-ढाई सौ का धागा खरीदना पड़ता है।
गरीबों को कोई पूछने वाला नहीं
अस्पताल में गरीबों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। गरीबी रेखा का कार्ड होने के बावजूद मरीज परेशान होकर केवल हस्ताक्षर करवाने के लिए भटकते हैं। प्राचार्य ने प्रत्येक विभाग में एक-एक चिकित्सक को कार्ड की छायाप्रति पर हस्ताक्षर करने की जिम्मेदारी सौंपी है, ताकि मरीजों को दिक्कत न हो सके। लेकिन कोई चिकित्सक मौजूद नहीं रहते।
हड़बड़ा गए प्राचार्य
दैनिक भास्कर की टीम ने कालेज का हालात मालूम करने के बाद प्राचार्य विश्वजीत मिश्रा से मुलाकात की। एक-एक अव्यवस्था सुनते-सुनते वे हड़बड़ा गए। उन्होंने फौरन अपने स्टाफ के कुछ कर्मचारियों को बुलाकर फाइलें मंगवायी और यह देखने लगे कि उन्होंने कब और कितनी बार दवा व उपकरण के लिए आवेदन किया है।
फाइल दिखाते हुए उन्होंने कहा कि हमने प्रस्ताव भेज दिया है। कुछ दवाइयों की सप्लाई डीएमई कार्यालय से होती है। हम कुछ नहीं कर सकते। हालांकि अंत में उन्होंने आश्वासन दिया कि एक हफ्ते के भीतर सब व्यवस्था पटरी पर आ जाएगी।