करोड़ों फूंकने के बाद भी बहुत बुरा है तालाबों का हाल

बिलासपुर। विधानसभा की समिति ने नगर निगम से पूछा है कि शहर के तालाब किस हालात में हैं। शहर के चार तालाबों को संवारने में नगर निगम ने करोड़ों रुपए फूंक दिए हैं। इसके बाद निगम के अमले ने दोबारा जाकर यह देखने की जरूरत नहीं समझी कि ये तालाब अब किस हाल में हैं। अकेले बंधवापारा तालाब पर डेढ़ करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं, फिर भी इसका काम अधूरा है। स्थिति यह है कि अब इसे संवारने के लिए काम शुरू करना हो तो लागत डेढ़ गुनी बढ़ जाएगी। विधानसभा समिति के सवाल से तालाबों की हालत सुधरने की उम्मीद बढ़ी है।
शहर में 10 तालाब हैं। इनमें से सरकंडा स्थित जोरापारा तालाब व वार्ड-45 महर्षि अरविंद नगर के जांजी तालाब का उपयोग अभी भी नागरिक कर रहे हैं। शेष 8 तालाबों की हालत उपयोग के लायक ही नहीं है। बंधवापारा हेमूनगर स्थित तालाब के सौंदर्यीकरण का काम पिछले सालभर से ठप पड़ा है। जतिया तालाब, तालापारा, डीपूपारा तारबाहर, करबला, मामा-भांजा तालाब, जोरा तालाब और चिंगराजपारा के तालाबों में से दो को छोड़कर शेष के सौंदर्यीकरण का काम फाइलों से नहीं उबर पा रहा है। तालाब व जलाशयों के उन्नयन के लिए छत्तीसगढ़ विधानसभा ने अशासकीय संकल्प पारित किया है। इसमें तय किया गया है कि प्रदेश के सभी नगरों व गांवों में तालाब और जलाशयों की पहचान कर सुरक्षित और व्यवस्थित किया जाए। नगरीय निकायों से तालाबों की स्थिति के बारे में विधानसभा समिति ने तीन बिंदुओं पर जानकारी मांगी है। इसमें सरोवर धरोहर योजना के तहत निर्माणाधीन तालाबों की स्थिति, तालाबों के उन्नयन का काम शुरू नहीं होने के कारण और तालाब व जलाशयों को संरक्षित करने के लिए अब तक किए गए उपायों के संबंध में ब्योरा मांगा गया है।
तीन तालाबों पर कर दिए तीन करोड़ से अधिक खर्च
विधानसभा समिति को भेजे गए ब्योरे में नगर निगम ने बताया है कि डीपूपारा तालाब के सौंदर्यीकरण पर एक करोड़ रुपए का खर्च किए गए हैं। हालांकि इसके सुधार व सौंदर्यीकरण पर डेढ़ करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। तालाब के किनारे बसे लोगों को पुनर्वास के बाद विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत बनाए गए पक्के मकान दिए गए हैं। तालाब के सौंदर्यीकरण का उद्घाटन मंत्री अमर अग्रवाल ने किया था। इसके कुछ महीने के बाद ही तालाब के घाट कपड़े धोने, मवेशियों को नहलाने जैसे काम में उपयोग किए जाने लगे हैं। तालाब में गंदगी व कचरे के ढेर हैं। इसी तरह जरहाभाठा स्थित जतिया तालाब पर 12 लाख रुपए खर्च किए गए, लेकिन हालात जस के तस हैं। बंधवापारा तालाब पर 1.30 करोड़ रुपए खर्च करने के बाद 1.14 करोड़ रुपए और खर्च करने की स्वीकृति मिली है। तालापारा तालाब की हालत सबसे ज्यादा खराब है। बीआरजीएफ के अंतर्गत दो साल पहले 25 लाख रुपए की स्वीकृति मिलने के बावजूद इसके उन्नयन का काम शुरू नहीं हो सका है।
तालाब के चारों ओर बेजा कब्जा की वजह से वह सिमटता जा रहा है। उन्नयन के बाद तालाबों की दुर्दशा नहीं होगी। स्थापना व्यय बढ़ने पर शासन से स्वीकृत 20 फीसदी राशि से इनका मेंटेनेंस किया जाएगा। यशवंत कुमार, कमिश्नर नगर निगम






