बिफरी महापौर के लिए इधर कुआं-उधर खाई
Source: bhaskar news | Last Updated 02:20(03/02/12)
रायपुर। राजधानी के विकास को लेकर महापौर और भाजपा के मंत्रियों-सांसद के बीच की टसल थमने का नाम नहीं ले रही। भाजपा ने गुरुवार को किरणमयी नायक पर सीधा हमला बोल दिया।
निगम में नेता प्रतिपक्ष सुभाष तिवारी ने महापौर को अबला नारी की संज्ञा देते हुए कहा है कि उनके साथ न पार्टी है, न आम जनता। सही मायने में वह महापौर बाय एक्सीडेंट हैं। मतदाताओं का उनको समर्थन नहीं हैं। भाजपा का कहना है कि महापौर ने आज तक ऐसा कोई काम किया ही नहीं, जिसे रोकने की कोशिश की जाए। महापौर समेत कांग्रेस पदाधिकारियों की उपेक्षा का मामला शुक्रवार को कांग्रेस भवन रायपुर में होने वाली प्रदेश स्तरीय बैठक में उठने वाला है। पार्टी का कहना है कि रायपुर ही नहीं बिलासपुर में भी महापौर को इसी तरह से हलाकान किया जा रहा है।
महापौर तो ‘अबला’ : भाजपा
शहर के विकास के मुद्दे पर सांसद से लेकर मंत्रियों को घेरने में लगीं महापौर किरणमयी नायक के खिलाफ भाजपा ने भी मोर्चा खोल दिया है। नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष सुभाष तिवारी का कहना है कि वास्तव में किरणमयी आज अबला की तरह हैं। जिनके साथ न तो उनकी पार्टी है, न ही आम लोग। जहां तक उनके महापौर बनने की बात है, तो उनका निर्वाचन जनता का समर्थन कम हादसा ज्यादा था। इस दुर्घटना से भाजपा ने भी सबक लिया है।
सुभाष तिवारी का कहना है कि सांसद रमेश बैस के घर हुई जिस बैठक को लेकर महापौर विवाद पैदा करने की कोशिश कर रही हैं, वह पार्टी की बैठक थी। अगर भाजपा के झंडे तले होने वाली बैठक में महापौर आना चाहती हैं, तो आ जाएं। उनका स्वागत है। कल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल कांग्रेसी महापौर, अध्यक्षों की बैठक बुला रहे हैं। उसमें भाजपा के पदाधिकारियों को नहीं बुलाया गया है। तो क्या भाजपाई नेता मुंह फुला लें? रही बात मंत्री राजेश मूणत के शहर में दौरों की, तो महापौर भूल जाती हैं कि मूणत विभागीय मंत्री होने के अलावा शहर के विधायक भी हैं। सभापति संजय श्रीवास्तव सभापति ने कहा है कि महापौर हर मसले पर चुनावी राजनीति करती है। कांग्रेस के 90 फीसदी से ज्यादा नेता उनसे नाराज है। कांग्रेस संगठन को भी वे नापसंद हैं। लोकसभा अध्यक्ष के कार्यक्रम में मेयर ने अजीत जोगी को निमंत्रण पत्र ही नहीं दिया था।
नेता प्रतिपक्ष सुभाष तिवारी ने कहा है कि मेयर का राजनीतिक जीवन केवल दो साल का है। दो साल के छोटे से राजनीतिक कैरियर में वे सीधे राज्य शासन के मंत्रियों और सांसद को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश कर रही हैं। केंद्र सरकार की जनहित से जुड़ी योजनाओं को भी मेयर आगे नहीं बढ़ा पा रही है। सबसे पहले महापौर ने जिला अध्यक्ष इंदरचंद धाड़ीवाल के फरमान को नहीं माना। जोन अध्यक्ष की वोटिंग के वक्त अंतिम समय में महापौर ने धाड़ीवाल के फरमान को न मानते हुए बाजी को पलट दिया था। निर्दलीय पार्षद के कहने पर कांग्रेस संगठन के वरिष्ठ नेता के सुंदरनगर स्कूल पर मेयर ने कार्रवाई की। इससे कांग्रेस के आला नेता नाराज हो गए। हाल ही में एमआईसी में मेयर ने जानबूझकर इंद्रावती कॉलोनी से राजीव नगर तक बनने वाले 8 करोड़ के नाले के प्रस्ताव को पास नहीं किया। अब इसे राज्य शासन के पास भेजा गया है। चार वार्ड से होकर यह नाला गुजरता है। बारिश में नाले के उफान की वजह से ही पूरा क्षेत्र डूबान में आता है।
आज पार्टी से शिकायत
रायपुर और बिलासपुर नगर निगम की महापौरों के साथ किए जा रहे भेदभाव का मुद्दा तीन फरवरी को कांग्रेस भवन में होने वाली बैठक में भी उठेगा। महापौर डॉ. किरणमयी नायक ने बताया कि तीन फरवरी को कांग्रेस भवन में होने वाली पार्टी की बैठक में पूरे घटनाक्रम रखा जाएगा। महापौर का कहना है कि संगठन की राय के बाद आगे की रणनीति तय होगी।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल का कहना है कि इस बारे में शिकायतें मिली हैं। कल की बैठक में पार्टी संगठन संबंधित लोगों से इस बारे में जानकारी लेगा। उसके बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी। प्रदेश कांग्रेस के महासचिव रमेश वल्र्यानी ने आरोप लगाया है कि राज्य की भाजपा सरकार उन नगरीय निकायों में समानांतर सता चलाना चाहती है, जहां कांग्रेस का अध्यक्ष या महापौर है। रायपुर और बिलासपुर नगर निगम उनके निशाने पर हैं। बिलासपुर निगम में तो आयुक्त महापौर वाणी राव के चेंबर में ही नहीं जाते।
राव के सारे प्रस्तावों को रद्दी की टोकरी में डाल दिया जाता है। उनको एक तरफ से शक्ति विहीन कर दिया गया है। रायपुर, बिलासपुर समेत सारे शहरों के नगरीय निकायों में जहां के मुखिया कांग्रेसी हैं, वहां लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर किया जा रहा है। अधिकारियों को ज्यादा अधिकार दिए जा रहे हैं। उनसे कहा जा रहा है कि वे कांग्रेसी पदाधिकारियों के साथ न जाएं। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस सड़क की लड़ाई लड़ेगी।
272 करोड़ पर मंत्री की मर्जी
महापौर किरणमयी नायक ने नगरीय प्रशासन मंत्री राजेश मूणत पर फिर उलझाने वाले फैसले करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि हाल ही में रायपुर निगम को 272 करोड़ रुपए दिए गए। मगर इसमें से एक रुपए भी निगम अपने हिसाब से खर्च नहीं कर सकता। 25 हजार की नाली निर्माण का पैसा भी तय करके दिया गया है। ये राज्य शासन के द्वारा हस्तक्षेप करना और अड़ंगा लगाना नहीं है तो फिर क्या है? साफ है कि पैसा मंत्री की मर्जी से ही खर्च करना होगा।दूसरी बात यह है कि जिस फायर ब्रिगेड नहीं खरीदने पर निगम को नाकाम बताया जा रहा है। उसके लिए निगम ने 25 जुलाई 2011 को प्रस्ताव बनाकर राज्य शासन को भेजा था। सात महीने बाद भी उसकी अनुमति नहीं मिली है। पांच करोड़ के इस वाहन को पहले भी लटकाया जा चुका है। अब मंत्री इसे सूडा के जरिए टेंडर करवा रहे हैं।
मंत्री इस बात की गारंटी दे सकते हैं क्या कि वाहन खरीदने तक अगर 30 फीट से ऊंची बिल्डिंग में आग लगती है, तो आग बुझाने की क्या व्यवस्था होगी। पूर्व मेयर सुनील सोनी के कार्यकाल में जुलाई 2009 को फायर ब्रिगेड के पैसे आए। उन्होंने कोई प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई। जनवरी 2010 में जब कांग्रेस की सरकार आई। उसके बाद एमआईसी की बैठक में 19 मार्च 2010 को स्वीकृति के लिए अनुशंसा की गई। तब से लेकर डेढ़ साल तक लगातार टेंडरिंग का प्रोसेस चलता रहा। पूर्व कमिश्नर राजेश टोप्पो ने तो वर्क ऑर्डर तक जारी कर दिया था। मगर फिर भी पैसे वापस नहीं दिए जा रहे हैं।
इसके अलावा उन्होंने बायो मेडिकल वेस्ट का प्रोजेक्ट, भागीरथी नल जल योजना का साढ़े आठ करोड़ का प्रोजेक्ट, महाराज बंध तालाब सौंदर्यीकरण का साढ़े चार करोड़ का प्रोजेक्ट, अंडर ग्राउंड सीवेज सिस्टम का प्रोजेक्ट बनाया। मगर इसे शासन ने सहमति नहीं दी।
जगह-वक्तव्य करें मंत्री : नायक
राजधानी के विकास में कौन राजनीति कर रहा है? किसकी वजह से प्रोजेक्ट अटके हैं? इस मुद्दे पर बड़ी लड़ाई का मैदान तैयार हो रहा है। सार्वजनिक स्थल पर खुली बहस की नगरीय प्रशासन मंत्री राजेश मूणत की चुनौती को महापौर किरणमयी नायक ने भी स्वीकार कर लिया है। बहस की जगह और वक्त मंत्री बता दें, मैं तैयार हूं।
भाजपा ने महापौर पर दागे सवाल
भाजपा महिला मोर्चा रायपुर जिले की अध्यक्ष श्रीमती मीनल चौबे ने महापौर किरणमयी नायक पर आरोप लगाते हुए कहा कि अपनी हठधर्मिता और असंवेदनशीलता के कारण रायपुर की महापौर रायपुर शहर का विनाश करने पर उतारू हैं। पद का अभिमान उनके सर चढ़ कर बोल रहा है। अहम और राजनीतिक दुर्भावना से ग्रसित महापौर अपने कर्तव्यों और दायित्वों को भूल गई हैं। अपने राजनीतिक अस्तित्व की रक्षा में वे शहर का बेड़ा गर्क करने में लगी हैं। जनता को इनकी राजनीतिक छवि से कोई लेना देना नहीं है।
रायपुर की जनता उनसे पांच सवालों का जवाब चाहती है:-
1. गरीबों के लिए बीएसयूपी योजना - झुग्गी मुक्त शहर का क्या हुआ?
2. दो वषरे बाद भी सौ सिटी बसें क्यों नहीं चला पाईं?
3. जल आवर्धन योजना में अपने कार्यकाल में कितनी टंकियां बनवाईं?
4. सफाई खर्च 8 करोड़ से 18 करोड़ पहुंचने के बावजूद शहर में गंदगी जस की तस क्यों?
शहरवासियों की गाढ़ी पसीने की कमाई कहां जा रही ?
5. दो वर्षो के पश्चात भी हाइड्रोलिक फायर टेंडर क्यों नहीं हो पाया?