राज्यदिल्ली
मध्य प्रदेश
राजस्थान
छत्तीसगढ़
हिमाचल
पंजाब
हरियाणा
चंडीगढ़
उत्तर प्रदेश
बिहार
झारखंड
महाराष्ट्र
गुजरात
जम्मू-कश्मीर
किसे अल्पसंख्यक स्कूल माने, सरकार में असमंजस
dainik bhaskar news
| Apr 19, 2012, 04:31AM IST
शिक्षा विभाग से अल्पसंख्यक स्कूलों की सूची मांगने पर इस बात का खुलासा हुआ। पता चला कि शासन के पास ऐसा कोई नियम ही नहीं है, जिसके आधार पर अल्पसंख्यक स्कूलों को मान्यता दी जाए। अल्पसंख्यक संस्थाएं बॉयलाज में खुद इसकी घोषणा करते हैं। इसके अलावा संस्था की कार्यकारिणी में सभी सदस्य अल्पसंख्यक हों तो यह मान लिया जाता है। यानी जैन, बौद्ध, मुस्लिम, सिख, इसाई आदि समुदाय के सदस्यों वाली संस्था से संचालित विद्यालयों को अल्पसंख्यक स्कूल माना जाता है, भले ही वहां अन्य समुदाय के छात्रों की संख्या अधिक हो।
ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का दुरुपयोग हो सकता है। ऐसी संस्थाएं खुद को अल्पसंख्यक स्कूल घोषित कर आरटीई से मुक्त हो सकती हैं। दुर्ग-भिलाई में कई बड़े स्कूल अल्पसंख्यक समुदाय ही संचालित कर रहे हैं। फिलहाल इनमें आरटीई के तहत 25 फीसदी गरीब बच्चों का एडमिशन हो रहा है। अल्पसंख्यक स्कूलों की मान्यता के लिए अलग नियम नहीं होने से समिति में कुछ संशोधन के बाद प्रत्येक संस्था खुद को आरटीई से बाहर बता सकती है। इसके लिए रजिस्ट्रार फर्म एंड सोसाइटी में जाकर सिर्फ कार्यकारिणी में दर्ज सदस्यों के नाम बदलने होंगे। फिर संस्था अल्पसंख्यक समिति की कहलाएगी और विद्यालय अल्पसंख्यक स्कूल।
पहुंचने लगे आवेदन
मरोदा भिलाई नगर में स्कूल संचालित करने वाली प्रगतिशील शिक्षा समिति ने डीईओ को आवेदन कर स्कूल को अल्पसंख्यक स्कूल घोषित करने कहा है। हालांकि अध्यक्ष हरविंदर कौर का कहना है कि आयोग ने उन्हें अल्पसंख्यक संस्था का प्रमाण दिया है। उसी के आधार पर आवेदन किया गया है। उनकी मंशा आरटीई से छूट पाने की नहीं है।
शिक्षा सचिव केआर पिस्दा से सीधी बात
अल्पसंख्यक स्कूल किसे मानते हैं?
-अल्पसंख्यक स्कूलों के रूप में राज्य शासन ने केवल मदरसों को मान्यता दी है। ऐसे कई स्कूल हैं, जिसे अल्पसंख्यक समुदाय संचालित कर रहे हैं।
स्कूलों को मान्यता के लिए कोई नियम है?
- सामान्य स्कूलों की तरह ही मान्यता दी जाती है। हमारे राज्य में ऐसी कोई जगह नहीं जहां अल्पसंख्यकों की संख्या 25 फीसदी से अधिक हो। संबंधित संस्था में ऐसा होना आवश्यक है।
स्कूल की मान्यता के लिए कौन से नियम का पालन करना होगा?
- फिलहाल हमारे पास सुप्रीम कोर्ट का आदेश नहीं आया है। तब तक कुछ नहीं कहा जा सकता। अगर ऐसा कोई मामला सामने आता है तो विधि संगत कार्रवाई की जाएगी।







