शर्मनाक: 7 साल की बच्ची के साथ स्कूल बस में महीनों तक हुई छेड़खानी
नई दिल्ली. गाजियाबाद के वसुंधरा इलाके में एक नामी स्कूल में पढ़ने वाली 7 साल की बच्ची का स्कूल बस चलाने वाले ड्राइवर और कंडक्टर ने ही महीनों तक यौन शोषण किया। दक्षिण दिल्ली में 3 साल के बच्चे के साथ उसकी स्कूल वैन के ड्राइवर ने गुरुवार की सुबह अप्राकृतिक दुष्कर्म कर इंसानियत को शर्मसार कर दिया। दिल्ली-एनसीआर में स्कूल जाने वाले मासूम बच्चों के साथ हुईं दरिंदगी की इन दो घटनाओं के बाद यह सवाल एक बार फिर खड़ा हो गया है कि क्या अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल के भरोसे पूरी तरह छोड़ सकते हैं? इसका साफ जवाब है नहीं। स्कूल जाने वाले हर बच्चे के मां-बाप को इन बातों का खयाल रखना चाहिए:
-कोशिश करें कि बच्चे को खुद स्कूल छोड़ें और फिर वहां से घर लाएं।
-अगर यह संभव नहीं है तो स्कूल से अनुरोध करें कि अंतिम 'ड्रॉप' किसी स्कूल टीचर का हो।
-स्कूल बस के स्टाफ के बारे में पूरी जानकारी लें और स्कूल प्रबंधन का भी ध्यान इस तरफ आकर्षित कराएं।
-बच्चों को सुरक्षित और असुरक्षित टच के बारे में जागरूक करें।
-बच्चों की बातों को गंभीरता से लें।
-स्कूल और उसके बाहर उनके साथ हो रहे बर्ताव को लेकर रोज़ बात करें।
-बच्चों को उनकी बातें शेयर करने के लिए हौसला बढ़ाएं।
स्कूल बसों के लिए कुछ नियम
-ओवरस्पीडिंग या शराब पीकर गाड़ी चलाते हुए पकड़े जाने वाले ड्राइवर को स्कूल अप्वॉइंट नहीं कर सकते।
-साल में दो बार चालान हो जाए तो उसे नौकरी नहीं दी जा सकती है।
-बस के बाहरी हिस्से पर स्कूल का नाम और टेलीफोन नंबर लिखा हुआ होना चाहिए।
जानकार बताते हैं कि जिन स्कूलों में बस का स्टाफ स्कूल के पेरोल पर होता है, उसकी जवाबदेही सीधे तौर पर तय की जा सकती है। लेकिन जिन स्कूलों में बाहर से बसें अनुबंधित कर चलवाई जाती हैं, वहां स्टाफ पर स्कूल का कोई सीधा नियंत्रण नहीं होता है। ऐसे में स्कूली बसों में बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। चाइल्ड राइट्स एक्टिविस्ट संजय सिंह के मुताबिक, 'जिन स्कूलों की बसों में बच्चे आते-जाते हैं, उनके लिए नेशनल कमिशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स की ओर से गाइडलाइंस तय की गई हैं। अगर किसी भी स्कूल में इन दिशा-निर्देशों का पालन नहीं होता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। अगर बस में लड़के हैं तो उन्हें बस में चढ़ाने-उतारने के लिए पुरुष स्टाफ और लड़कियां हैं तो महिला स्टाफ होना जरूरी है।'
गाजियाबाद के वसुंधरा इलाके में एक नामी स्कूल में पढ़ने वाली 7 साल की बच्ची का स्कूल बस चलाने वाले ड्राइवर और कंडक्टर ने ही महीनों तक यौन शोषण किया। यह बात तब सामने आई जब पीड़ित लड़की ने अपने माता-पिता से प्राइवेट पार्ट्स में हो रही समस्या के बारे में बताया। पुलिस से शिकायत किए जाने के बाद दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है।
क्या थी घटना:
पहली क्लास में पढ़ने वाली बच्ची ने अपनी शिकायत में कहा है कि ड्राइवर और कंडक्टर उसके साथ तब गलत हरकतें करते थे, जब बस स्कूल के बाहर खड़ी रहती थी। गाजियाबाद की घटना में अभिभावकों का कहना है कि स्कूल से इस बारे में शिकायत करने के बावजूद बस स्टाफ पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद ही अभिभावकों ने पुलिस से शिकायत की।
वहीं, दूसरी घटना में दक्षिण दिल्ली में 3 साल के बच्चे के साथ उसकी स्कूल वैन के ड्राइवर ने गुरुवार की सुबह अप्राकृतिक दुष्कर्म कर इंसानियत को शर्मसार कर दिया। बच्चे ने स्कूल से लौटने के बाद तेज दर्द होने की शिकायत की। इसके बाद उसे एम्स में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने पाया कि बच्चे के साथ अप्राकृतिक दुष्कर्म किया गया है। डॉक्टरों ने इसकी जानकारी पुलिस को दी और आरोपी ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया गया।
क्या कहते हैं टीचर:
नोएडा के विश्व भारती स्कूल की टीचर रमा शर्मा ने इस बारे में कहा, 'स्कूल खुद ही गाइडलाइन तय करें ताकि गाजियाबाद जैसी घटना न हों।'
नोएडा सेक्टर-11 के नेहरू इंटरनेशनल स्कूल की प्रिंसिपल एलिना दयाल ने कहा, 'बसों में स्कूल से स्टाफ होना अनिवार्य होना चाहिए। स्टाफ बच्चों से लेकर बस चलाने वालों पर नज़र रख सकता है।'
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