नई दिल्ली: यह महज एक संयोग हो सकता है कि 13 दिसंबर 2001 को संसद भवन पर आतंकवादी हमले के दोषी मोहम्मद अफजल गुरू को 9 फरवरी को फांसी दी गई, जबकि इसी जेल में ठीक दो दिन बाद की तारीख यानी 11 फरवरी 1984 को एक कुख्यात अपराधी को भी फांसी दी गई थी।
11 फरवरी, 1984 को कश्मीरी अलगाववादी मकबूल भट को तिहाड़ जेल में फांसी दी गई थी। मकबूल को फांसी देने का फैसला बर्मिंघम में जम्मू एवं कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के सदस्यों द्वारा भारतीय राजनयिक रवींद्र म्हात्रे के अपहरण और हत्या के बाद लिया गया था। मकबूल भी इसी संगठन से संबद्ध था।
तिहाड़ भारत की सबसे बड़ी जेल है, जिसमें 24 साल बाद शनिवार को अफजल गुरु को फांसी दी गई। सूत्र के मुताबिक, इससे पहले इस जेल में छह और लोगों को फांसी पर लटकाया जा चुका है।
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