नई दिल्ली. दिल्ली नगर निगम के वाडरें को नए सिरे से आरक्षित किया जाना निगम पार्षदों के गले नहीं उतर रहा है। राज्य चुनाव आयुक्त राकेश मेहता द्वारा किए वार्ड निर्धारण के खिलाफ सोमवार को दो पार्षद खुलकर सामने आ गए। उन्होंने अपनी बात राज्य चुनाव आयुक्त तक पहुंचाई है।
विधानसभा क्षेत्र कालकाजी के वार्ड संख्या 93, श्रीनिवासपुरी के निगम पार्षद धर्मवीर सिंह और ईस्ट ऑफ कैलाश की महिला पार्षद महिन्द्र कौर निरुला ने सोमवार को राज्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात कर वार्ड निर्धारण के खिलाफ शिकायत की। दोनों पार्षदों का आरोप है कि वाडरें का निर्धारण गलत तरीके से किया गया है, जिसकी वजह से उनके वार्ड आरक्षित श्रेणी में आ गए हैं।
गौरतलब है कि श्रीनिवासपुरी वार्ड को सामान्य से महिला में परिवर्तित कर दिया गया है, वहीं ईस्ट ऑफ कैलाश वार्ड को महिला वार्ड से महिला एससी में परिवर्तित कर दिया गया है। पार्षदों की दलील थी कि संगम विहार विधानसभा में अनुसूचित जाति की संख्या 13.63 फीसदी है, जबकि कालकाजी विधानसभा क्षेत्र में अनुसूचित जाति की संख्या 12.59 फीसदी है। इसके बावजूद दक्षिण दिल्ली नगर निगम में संगम विहार को आरक्षित श्रेणी में शामिल करने के बजाय कालकाजी विधानसभा क्षेत्र को शामिल कर लिया गया। धर्मवीर सिंह का कहना था कि यदि संगम विहार विधानसभा को आरक्षित श्रेणी में शामिल किया जाता है तो उनके वाडरें की स्थिति पूर्ववत रहेगी।
उन्होंने मांग की कि एमसीडी का चुनाव वर्ष 2007 में हुए एमसीडी चुनाव के आधार पर ही किया जाए। साथ ही, उन्होंने सम और विषम संख्या के आधार पर महिला और पुरुष वाडरें के निर्धारण की भी खिलाफत की। इस मामले में महिन्द्र कौर निरुला का कहना था कि एमसीडी वाडरें का निर्धारण विधानसभा के आधार के बदले वार्ड के आधार पर किया जाए। दोनों पार्षदों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं को राज्य चुनाव आयुक्त ने गंभीरता से नहीं लिया तो वो अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।