नई दिल्ली। शनिवार की सुबह सिंगापुर से वह दुखद ख़बर आई। सूरज उगने से पहले, कि वह सो गई हमेशा के लिए। देश बिस्तर से उठा ही नहीं, जाग गया। शायद हमेशा के लिए। कश्मीर से कन्याकुमारी तक, अगरतला से जूनागढ़ तक पसरे शोक को देखकर नहीं लगता कि फिर सो जाने की हिम्मत करेगा हिन्दुस्तान।
सिंगापुर के माउंट एलिज़ाबेथ अस्पताल में शाम गहराने से पहले ही उसकी सांसें उखड़ने लगी थी। शरीर के सारे अंग मस्तिष्क से चलते हैं और उसके मस्तिष्क में पानी जमने लगा था। सेरेब्रल ईडीमा उसके दिमाग़ में घर कर रहा था। उसी ने सुला दिया उसको।
शरीर के बाक़ी अंगों की पीड़ा और फिर उनके निष्क्रिय हो जाने को, हृदयघात को उसकी जिजीविषा ने मात दे दी थी। मृत्यु से लड़ने में दवा तो दिल्ली के सफ़दरजंग में ही हार गई थी। डॉक्टर हार नहीं मान रहे थे क्यूंकि वह हार नहीं मान रही थी।