नई दिल्ली. दिल्ली पुलिस ने समाचार चैनल 'जी न्यूज' के खिलाफ
आईपीसी की धारा 228 ए के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। यह धारा उस पर लगाई जाती है जिसने किसी न किसी रूप में बलात्कार पीडि़त की पहचान जगजाहिर की हो। लेकिन आईपीसी की इस धारा में यह भी प्रावधान है कि अगर पीडि़त मर गई हो या वह अपनी पहचान सार्वजनिक करने की लिखित इजाजत दे चुकी हो या फिर मामले की सुनवाई कर रही अदालत ने ऐसा करने का आदेश दिया हो तो पहचान सार्वजनिक करना अपराध नहीं माना जाएगा। ऐसे में कानूनी तौर पर समाचार चैनल कितना सही है और कितना गलत, यह फैसला अब कोर्ट को करना है। लेकिन नैतिक रूप से उसके इस कदम पर बहस तेज हो गई है। (
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16 दिसंबर की रात 'दामिनी' के साथ मौजूद रहे उसके दोस्त ने बताया- बस में सवार छह लोगों ने हमें बेरहमी से मारा। बस के शीशों पर काली फिल्म चढ़ी थी और पर्दे लगे थे। लाइटें भी बंद थीं। हम एक-दूसरे को बचाने की कोशिश कर रहे थे। शोर भी मचाया। मेरे दोस्त ने पुलिस को फोन करने का प्रयास भी किया। लेकिन गुंडों ने उनका मोबाइल छीन लिया। मेरे सिर पर रॉड मारी गई। फिर मैं बेहोश हो गया। होश आया तो देखा-वे बस को यहां से वहां दौड़ा रहे हैं। कोई दो-ढाई घंटे तक ऐसा चलता रहा। उसके बाद महिपालपुर फ्लाईओवर के नीचे हम दोनों को फेंक दिया। वे मेरी दोस्त को कुचलना भी चाहते थे। लेकिन किसी तरह मैंने उन्हें खींचकर बस के नीचे आने से बचाया। हमारे पास कपड़े नहीं थे। शरीर से खून बह रहा था। हम इंतजार करते रहे कि कोई तो मदद करेगा। कई गाड़ियां पास से गुजरीं, मैंने हाथ हिलाकर रुकने को कहा.. ऑटो, कार वाले स्पीड स्लो करते लेकिन रुका कोई नहीं। मैं चिल्लाता रहा कि कोई कपड़े तो दे दो। लेकिन किसी ने कपड़े नहीं दिए। 20-25 मिनट तक हम मदद के लिए लोगों को पुकारते रहे। 15-20 लोग वहां खड़े थे। कोई कह रहा था कि लूट का मामला होगा। डेढ़-दो घंटे हम वहीं पड़े रहे। फिर किसी के फोन करने पर पुलिस आई। पीसीआर के तीन वैन आए। पर पुलिस इस बात पर बहस करती रही कि यह मामला किस थाने का है...
'दामिनी' के दोस्त ने जो कहा
(आगे की स्लाइड में पढ़ें- उसने उस रात की घटना के बारे में और क्या कहा) वह पुलिस और समाज की संवेदनहीनता का खौफनाक चेहरा दिखाता है। उसके आरोपों से पुलिस इनकार कर रही है
(पढ़ें- पुलिस की सफाई) लेकिन पूर्व आईपीएस किरण बेदी का कहना है कि ऐसा तो होता ही रहा है। अब यह बात जगजाहिर हुई है। इससे सबक लेना चाहिए और पुलिस में सुधार तेज करना चाहिए।