'हम अपनी नाकामी पर शर्मिंदा हैं, आपकी रक्षा नहीं कर सके!'

नई दिल्ली. जंतर-मंतर पर शोक संवेदना जताने और पीडि़ता को न्याय दिलाने के लिए जमा हुए लोगों ने पोस्टर व बैनरों पर नारे लिखकर गम व गुस्सा जताया।
ट्राइसाइकिल पर सवार होकर प्रदर्शन में शामिल होने आए एक व्यक्ति ने बैनर लगा रखा था कि 'हम अपनी नाकामी पर शर्मिंदा हैं, आपकी रक्षा नहीं कर सके, आपके प्राणों की सौगंध, बलिदान बेकार नहीं जाएगा।'
रविवार को दिल्ली बंद का आह्वान करने वाले एक पोस्टर पर लिखा था, 'आवाज दो, आज बहनों के लिए नहीं आए तो कल बेटियों को कैसे बचाओगे।'
कुछ छात्र पोस्टर लिए घूम रहे थे कि राष्ट्र शर्मिंदा है, कातिल अभी जिंदा है। कुछ के हाथ में पोस्टर थे-क्षुब्ध हृदय है बंद जुबां। एक छात्रा ने लिख रखा था, 'लड़की को सिंगापुर भेजा तो रेपिस्ट को सऊदी अरब क्यों नहीं।'
अरब पर लड़की ने साफ किया कि वहां सजा के रूप में दुष्कर्मियों की गर्दन सरेआम काट दी जाती है। एक लड़की द्वारा अंग्रेजी में लिखे नारे से उसका गुस्सा झलक रहा था-किल मैन इन वूंब, इफ यू कांट प्रोटेक्ट मी।
इसी तरह एक अन्य पोस्टर पर लड़की ने लिखा था, 'कोई ऐसी बात जिससे लड़की की गरिमा का उल्लंघन होता है वह दुर्लभ से दुर्लभतम की श्रेणी में आती है।'
निराशा को झलकाते पोस्टर कह रहे थे-इस देश में लड़कियों को मरने के बाद ही आजादी मिलती है। एक अन्य पोस्टर में लिखा था-पहले अपना बलात्कार कराओ, फिर सरकारी नौकरी पाओ। कुछ नारों में पीडि़ता का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार व उसके नाम पर टिकट जारी करने की मांग की गई।
यह जताने के लिए यह प्रदर्शन आम लोगों का है, इसके लिए एक पोस्टर पर लिखा था कि हम किसी राजनीतिज्ञ को नहीं चाहते, हमें रेपिस्ट चाहिए। उसे फांसी दो।
कई प्रदर्शनकारी इस घटना को पूंजीवाद से जोड़कर देख रहे थे। इस तरह के एक पोस्टर में लिखा था, अपराध, अराजकता व लंपटता का स्रोत पूंजीवाद है, आदमी नहीं।
इसी का विस्तार की अभिव्यक्ति एक दूसरे पोस्टर पर थी, जिसमें लिखा था- फिल्म व टीवी सीरियलों के जरिए समाज में अश्लीलता परोसना बंद करो।








