हजारों लोग जमा थे, फिर भी हर ओर था सिर्फ और सिर्फ मौन!

नई दिल्ली. सिंगापुर से पीडि़ता के मौत की खबर से गमजदा लोगों ने जंतर-मंतर पर पहुंचकर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन किया। अधिकांश लोगों ने अपने मुंह पर काली पट्टी बांधकर मौन प्रदर्शन किया। पीडि़ता को श्रद्धांजलि देते हुए शाम को प्रदर्शनकारियों ने कैंडल मार्च निकाला।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन को देखते हुए शाम को पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से कुछ नरमी बरती और उन्हें कैंडल मार्च निकालने के लिए संसद मार्ग की ओर जाने के लिए इजाजत दे दी गई और प्रदर्शनकारी संसद मार्ग होते हुए वापस जंतर-मंतर पहुंचे। हालांकि जंतर-मंतर व आसपास के इलाके में पुलिसकर्मियों की तादाद प्रदर्शनकारियों की तुलना में कहीं ज्यादा थी।
पुलिस ने शनिवार सुबह पौने आठ बजे से ही 10 मेट्रो स्टेशन बंद करा दिए और इंडिया गेट, विजय चौक व राजपथ को जोडऩे वाली प्रमुख सड़कों पर कड़ी नाकेबंदी कर रखी थी और जंतर-मंतर को छोड़कर पूरे नई दिल्ली इलाके में धारा 144 लागू कर दी थी।
इसके चलते जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए पहुंचने वाले लोगों को काफी दूर-दूर से पैदल चलना पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने सबसे ज्यादा हिस्सेदारी जेएनयू सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्रों की थी। इसके अलावा आमजन भी स्वत:स्फूर्त तरीके से प्रदर्शन में शामिल हुए।
जंतर मंतर पर एक पोस्टर पर पीडि़ता का एक काल्पनिक नाम दामिनी लिखकर उस पर गुलाब के फूलों की माला चढ़ाई गई थी, आने वाले प्रदर्शनकारी उसी पोस्टर पर प्रतीकात्मक रूप से फूल अर्पित कर अपनी श्रद्धांजलि दे रहे थे। सैकड़ों लोगों ने जमीन पर लेटकर भी प्रदर्शन किया। तमाम लोग अपने हाथों में बैनर व पोस्टर लेकर न्याय की गुहार लगा रहे थे, रह-रहकर वी वांट जस्टिस के नारे भी सुनाई देते रहे।
उधर, जेएनयू के छात्रों ने कैंपस से मुनिरका के उस बस स्टॉप तक मौन जुलूस निकाला जहां से पीडि़ता ने व्हाइट लाइन बस में अपनी दुखद यात्रा शुरू की और बस स्टॉप को एक स्मारक की तरह सजा दिया। छात्रों ने यहां श्रद्धासुमन अर्पित किए और बड़े पोस्टर पर अपनी शोक संवेदनाएं व्यक्त की और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की।
जंतर-मंतर पहुंची शीला, विरोध के चलते वापस लौटीं :
गैंगरेप की पीडि़ता के प्रति शोक संवेदना जताने व न्याय की मांग के लिए जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन में शामिल होने के लिए शनिवार को दोपहर करीब सवा दो बजे दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित भी पहुंची।
लेकिन वहां पहुंचते ही मौजूद प्रदर्शनकारियों ने शीला दीक्षित को घेरकर उनके खिलाफ जमकर नारेबाजी शुरू कर दी। नतीजतन कड़े सुरक्षा घेरे के बीच मुख्यमंत्री ने एक पेड़ के नीचे एक गुलाबी रंग की मोमबत्ती जलाकर अपनी संवेदना जताई और वहां से वापस हो लीं।
मुख्यमंत्री ने इससे पहले सुबह केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे से फोन पर बातचीत कर यह आग्रह किया था कि पीडि़ता के प्रति अपनी शोक संवेदना जताने के लिए लोग इंडिया गेट पर जमा होना चाहते हैं, उन्हें शांतिपूर्ण प्रदर्शन की इजाजत देनी चाहिए। उनका कहना था कि पाबंदियों के चलते लोग बेहद परेशान हैं, जंतर-मंतर एक छोटी जगह है, इंडिया गेट पर खुली जगह में ज्यादा लोग जमा हो सकते हैं।
जंतर-मंतर से लौटने के बाद मुख्यमंत्री ने फोन पर कहा कि वह जंतरमंतर पर पीडि़ता को श्रद्धांजलि देने व आंदोलनकारियों का हिस्सा बनने पहुंची थीं।- जबकि सुरक्षाकर्मियों से घिरी शीला से प्रदर्शनकारियों ने सवाल किया कि बीते 10-12 दिन से राजधानी में आंदोलन चल रहा है, तब वे कहां थीं? आज क्या वे यहां राजनीति करने आई हैं?
जेएनयू से मुनिरका तक निकाला जुलूस
युवती की मौत पर शनिवार को जेएनयू छात्रों ने भी प्रदर्शन किया। उनका यह प्रदर्शन इस बार मौन जुलूस के रूप में निकाला गया। दोपहर साढ़े बारह बजे यह जुलूस जेएनयू से निकला जिसमें तीन सौ से अधिक छात्र-छात्राएं शामिल हुए।
बिना किसी शोर शराबे और नारेबाजी के निकाले गए जुलूस में आम आदमी भी जुड़ते गए। जेएनयू से निकला यह जुलूस पहले आईएसटीएम इंस्टीट्यूट के पास पहुंचा और फिर वहां से मुनिरका के डीडीए फ्लैट्स बस स्टॉप पर जाकर खत्म हुआ। बता दें कि इस बस स्टॉप से ही छात्रा बस में सवार हुई थी।
लोगों ने यहां अपने साथ लाए पुष्प अर्पित कर उसे श्रद्धांजलि दी।इस दौरान जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष वी. लेनिन कुमार ने कहा कि युवती का संघर्ष बेकार नहीं जाएगा, हम उसे न्याय दिलाने के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। जब तक सरकार इस मामले में दोषियों को उनकी करतूत की सजा नहीं देती तब तक हम इसके लिए लड़ते रहेंगे।







