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फैंस को अपना मरा मुंह नहीं दिखाना चाहते थे देव साहब

Agency | Dec 05, 2011, 11:34AM IST
 
 


नई दिल्ली. सदबहार अभिनेता देवानंद के सहयोगी मोहन ने जानकारी दी है कि उनका पार्थिव शरीर भारत नहीं लाया जाएगा और बुधवार तक लंदन में उनका अंतिम संस्कार कर दिया जाएगा। मोहन का कहना है कि देवानंद की इच्छा के मुताबिक ऐसा किया जाएगा, जिन्होंने कहा था कि अगर वे देश के बाहर अंतिम सांस लेते हैं तो उनका अंतिम संस्कार वहीं कर दिया जाए। देव साहब यह भी नहीं चाहते थे कि उनका मरा हुआ मुंह उनके फैंस को दिखाया जाए। उनकी इच्‍छा थी कि उनका अंतिम संस्‍कार चुपचाप किया जाए।
 
देवानंद का 88 साल की उम्र में लंदन में निधन हो गया। भारतीय समय के मुताबिक रविवार तड़के 3.30 बजे उन्होंने लंदन के वॉशिंगटन मेफेयर होटल में अंतिम सांसें लीं (देवानंद कब और क्यों लंदन गए, जानने के लिए रिलेटेड आर्टिकल पर क्लिक करें)।देवानंद ने वॉशिंगटन मेफेयर होटल के अपने कमरे में नींद के दौरान ही अपनी अंतिम सांसें लीं। 
 
 
देवानंद का परिवार पिछले २० दिनों से इसी होटल में ठहरा हुआ था। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने देवानंद को श्रद्धांजलि दी है।
 
देवानंद का स्वास्थ्य कुछ दिनों से ठीक नहीं चल रहा था और अपने चेकअप के लिए वे लंदन गए  हुए थे।  बताया जा रहा है कि जब देवानंद ने अंतिम सांसें ली तो उनके पुत्र सुनील उनके साथ ही थे। देवानंद ने 1946 में फ़िल्मी दुनिया में क़दम रखा था और फ़िल्म थी हम एक हैं। इसके बाद उन्हें कई फ़िल्में मिलीं और एक वर्ष बाद जिद्दी के आने तक वे बड़े अभिनेता के रुप में स्थापित हो गए थे (मशहूर हस्तियां कैसे दे रही हैं देवानंद को श्रद्धांजलि, पढ़ने के लिए रिलेटेड आर्टिकल पर क्लिक करें)
देवानंद ने कई बेहतरीन फ़िल्में की और अपने अभिनय का लोहा मनवाया। इन फ़िल्मों में पेइंग गेस्ट, बाज़ी, ज्वेल थीफ, गाइड, सीआईडी, जॉनी मेरा नाम, अमीर गरीब, हरे रामा हरे कृष्णा और देस परदेस का नाम लिया जा सकता है। देवानंद को २००१ में पद्मभूषण और २००२ में दादा साहब फाल्के पुरस्कार से नवाजा जा चुका है। उम्र के इस पड़ाव पर भी वे फिल्मों में सक्रिय थे और कुछ फिल्मों का निर्देशन और निर्माण कर रहे थे।
 
देवानंद का जन्म अविभाजित पंजाब के गुरदासपुर (अब पाकिस्तान का नरोवल जिला) में 26 सितंबर, 1923 में हुआ था। देवानंद के माता-पिता ने उन्हें धर्मदेव आनंद नाम दिया था। उनके पिता किशोरीमल आनंद मशहूर वकील थे। देवानंद ने लाहौर कॉलेज से अंग्रेजी में बीए किया था।  
1948 में देवानंद को पहली बड़ी कामयाबी मिली थी जब फिल्म जिद्दी बॉक्स ऑफिस पर हिट रही। 1949 में उन्होंने नवकेतन नाम से अपनी प्रॉडक्शन कंपनी लॉन्च की थी, जिसने कई यादगार फिल्में बनाईं। गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों में बॉलीवुड की कई नामी हस्तियों का निधन हुआ है। इनमें जगजीत सिंह, शम्मी कपूर और उस्ताद सुल्तान खां शामिल हैं।
श्रद्धांजलि
आप देवानंद और फिल्मों में उनके योगदान को किस तरह याद करेंगे? देवानंद को अपनी श्रद्धांजलि देने के लिए नीचे बॉक्स में क्लिक कीजिए।
Exclusive: ईसीजी रिपोर्ट के कारण ही देव साहब गए थे लंदन!

 
 
 

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