नई दिल्ली. जहां एक ओर पूरी दुनिया इस 'महात्मा' के असामयिक निधन से स्तब्ध थी, वहीं एक कृतज्ञ राष्ट्र अपने 'बापू' के मौन हो जाने पर अवाक था. महात्मा गांधी की 'अंतिम यात्रा' ही इस देश की जनता के लिए वह अंतिम रास्ता था, जहां वह अपनी श्रध्दा को आंसुओं में व्यक्त कर सकती थी.
इस वीडियो में उमड़े जनसैलाब को देख आप अंदाजा लगा सकते हैं कि क्यों एक व्यक्ति जो राष्ट्र की सेवा के लिए निकला था अपने कर्मो से कर्तव्य के उस शिखर पर पहुंच गया, जहां अब तक गढ़े गए सारे पद और सम्मान उसके लिए बौने लगने लगे. अंततः उन्हें एक ऐसी उपाधि (राष्ट्रपिता) से नवाजा गया, जिसे पाने वाले वह पहले और अंतिम शख्स थे.
महात्मा गांधी की अंतिम यात्रा से जुड़े कुछ तथ्य:
1. राष्ट्रपिता की अंतिम यात्रा बिरला हॉउस से शुरू हुई और लगभग साढ़े पांच किलोमीटर का रात तय करते हुए यमुना किनारे स्थित राजघाट पहुंची थी.
2. जिस बग्घी पर उनकी निष्प्राण देह रखी गई थी, उस पर सरदार बल्लभ भाई पटेल, सरदार वल्लभ सिंह, आचार्य कृपलानी और जवाहार लाल नेहरु सवार थे.
3. जबकि लॉर्ड और लेडी माउन्ट बेटन अपनी बेटी के साथ इस अंतिम यात्रा में शामिल थे और वो पैदल चलकर राजघाट पहुंचे थे.
4. इनके अलावा इस यात्रा में लगभग दस लाख लोग शामिल थे.
5. लगभग 5000 पुलिस बल को लोगों को संभालने के काम में लगया गया था.
6. जिस जगह पर उनकी अस्थियां पड़ी थी अगले दिन वहां पर भी बड़ी संख्या में लोगों ने आकर अपना सम्मान व्यक्त किया.
वीडियो साभार : यू-ट्यूब