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डीयू में साढ़े चार हजार शिक्षकों की है कमी
Bhaskar News Network
| Aug 26, 2012, 01:05AM IST

क्यों बनी हुई है कमी : डीयू में 2010 के बाद से नियमित शिक्षकों की नियुक्ति बंद है। पहले इसकी वजह यूजीसी की ओर से नई सेवा शर्तो का लागू होना बताया जा रहा था। इसके लागू होने के बाद अब डेढ़ साल से कुलपति प्रो. दिनेश सिंह की ओर से नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर बनाई गई विशेष समिति की रिपोर्ट का इंतजार है।
दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (डूटा) अध्यक्ष अमरदेव शर्मा की मानें तो कॉलेजों में सीधे एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर की नियुक्ति व शिक्षकों के लिए एक डेटा पूल तैयार करने की प्रक्रिया के चलते नियुक्तियों को रोके रखना जायज नहीं है। प्रशासन की इसी अड़ियल सोच के चलते शिक्षकों की कमी लगातार बढ़ती जा रही है।
क्या है खाली पदों का गणित : डीयू में शिक्षकों के स्वीकृत पद करीब 9 हजार हैं जिसमें से साढ़े चार हजार रिक्तियों के चलते एडहॉक शिक्षकों के जरिए काम चलाया जा रहा है। ओबीसी आरक्षण के चलते बढ़ी ग्रेजुएशन की 54 फीसदी सीटों के बाद भी डीयू में 2561 नई नियुक्तियां अंजाम दी जानी है। प्रक्रिया के पहले चरण में 1282 शिक्षकों की नियुक्तियां प्रस्तावित हैं जो लटकी पड़ी हैं।
एक महीने तक नहीं हुई पढ़ाई : कॉलेजों में शिक्षकों की कमी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उत्तरी परिसर के एक टॉप कॉलेज में बीएससी मैथमेटिक्स के छात्रों के लिए फीजिक्स के ऑप्शनल पेपर की पढ़ाई एक माह देरी से शुरू हुई। वजह थी कि यहां इस विषय के लिए एडहॉक शिक्षक की नियुक्ति में एक माह का समय लगा।
समस्या का क्या है समाधान
एकेडमिक्स फॉर सोशल जस्टिस के प्रमुख हंसराज सुमन व डूटा कार्यकारिणी सदस्य डॉ. आभा देव हबीब का कहना है कि है 2010 से बंद नियमित शिक्षकों की नियुक्तियां जारी रहतीं तो यह हालात पैदा नहीं होते। नए नियमों व कमेटी की सिफारिशों के आने तक इंतजार करने के बजाय ये अब जरूरी हो गया है कि मौजूदा व्यवस्था के तहत ही नई नियुक्तियां अंजाम दी जाएं।
शिक्षकों के न होने से हो रही परेशानी
-एडहॉक शिक्षकों की नियुक्ति 120 दिनों के लिए होती है। ऐसे में नौकरी को लेकर बने रहने वाले अनिश्चितता के माहौल में उन्हें रोके रख पाना मुश्किल होता है।
-टॉप कॉलेजों में शुमार दौलतराम कॉलेज में शिक्षकों की कमी का आलम यह है कि यहां संस्कृत विभाग में टीचर इंचार्ज एक एडहॉक शिक्षक है। यही स्थिति दयाल सिंह कॉलेज की भी है।
-अंग्रेजी, कंप्यूटर साइंस, इकोनॉमिक्स व लॉ में शिक्षण से परे बेहतर विकल्प और विवि में नियमित नियुक्ति न मिलने से यहां एडहॉक शिक्षक भी मुश्किल से मिलते हैं।








