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ई-कचरा फैलाने में दिल्ली नं-2

णति तिवारी | Aug 23, 2012, 03:17AM IST
 
 

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली देश में ई-कचरा पैदा करने वाला दूसरा सबसे बड़ा शहर है। यहां हर साल ५२ हजार टन ई-कचरा निकलता है।



राजधानी के आम कबाड़ी इन्हें घर-घर से इकट्ठा कर इसमें मौजूद प्लास्टिक व अन्य तत्वों को निकालने का काम करते हैं। इसके लिए वे तय प्रक्रिया का पालन किए बगैर इन्हें जलाते या गलाते हैं। ऐसे में निकलने वाली गैसें न केवल वायु को विषैला करती हैं बल्कि जलने के बाद बचे अवयव मिट्टी व भूजल में भी जहर घोल देते हैं।



राजधानी के सीलमपुर, शास्त्री पार्क, ग्रेटर कैलाश व मायापुरी के कबाड़ बाजारों में ई-कचरे के ढेर लगे हैं और यहां उनका गैरकानूनी ढंग से धड़ल्ले से निपटारा किया जा रहा है। सीपीसीबी के पर्यावरण वैज्ञानिक लोकेश कुमार बताते हैं कि कंप्यूटर का सबसे विषैला अंग मदरबोर्ड है। इसमें भारी मात्रा में लेड और क्रोमियम होता हैं।


दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग के निदेशक डॉ. अनिल कुमार का कहना है कि लोग ई-कचरे को कबाड़ियों के हाथ बेच देते हैं जो इन्हें पिघला या जलाकर पर्यावरण और स्वास्थ्य के साथ खेलते हैं। ई-कचरे का सही तरीके से निपटान न करना कानूनी रूप से एक अपराध है। यह जानकारी होने के बावजूद लोग इस तरह की लापरवाही करते हैं।

यह है कानून



दिल्ली में ई-कचरा प्रबंधन व संचालन अधिनियम 2011 के तहत कबाड़ी को ई-कचरा बेचने की सूरत में न केवल पांच साल की जेल बल्कि एक लाख रुपए तक का जुर्माना भी चुकाना पड़ सकता है। इन्हें फेंकने के लिए ऑथोराइज्ड कलेक्टरों से संपर्क करना जरूरी है। दिलचस्प बात यह है कि इस के तहत आज तक किसी भी कबाड़ी को न पकड़ा गया न सजा मिली।


केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एक रिपरेट के मुताबिक, कंप्यूटर से उपजने वाले ई-कचरों का हमारे स्वास्थ्य पर तेजी से प्रभाव पड़ रहा है। इनमें से प्रमुख हैं



: मदरबोर्ड, इसमें बेरेलियम होता है। इसके धुएं लंग कैंसर व चर्मरोग के लिए जिम्मेदार है।
: प्रिंटेड सर्किट बोर्ड का सोल्डर, ग्लास पैनल, कंप्यूटर मॉनिटर बास्केट के जलने से निकलने वाली गैस व अन्य अवयव शरीर में पहुंचकर नर्वस सिस्टम, खून और किडनी को प्रभावित करते हैं।
: चिप रस्टिरस-प्रतिरोधक क्षमता पर करता है असर।
: सेमी कंडक्टर्स के जलने से निकलने वाले तत्व किडनी और लीवर को नुकसान पहुंचाते हैं।
: मर्करी के सर्किट बोर्ड के जलने से दिमाग, त्वचा व श्वसन प्रणाली प्रभावित होती है।
: हेजवैलेन्ट क्रोमियम के शरीर में पहुंचने से फेफड़ों की सूजन, डीएनए को नुकसान होता है।
:केबलिंग और कंप्यूटर फ्रेम जलाने से डाईऑक्सीन निकलती है, जिससे हार्मोस प्रभावित होती है।
:सीआरटी के सामने का फ्रंट पैनल (बेरियम) के जलने पर मांशपेशियों में कमजोरी के साथ हृदय, लिवर को नुकसान होता है।
 
 
 

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