नई दिल्ली. फलक ही नहीं, राजधानी में कई और बच्चे ऐसे हैं जो अपने दुर्भाग्य पर रो रहे हैं और तमाम तरह की मुसीबतों का सामना कर रहे हैं। ऐसा ही एक अन्य मामला सामने आया है।
रांची में रहने वाली एक 11 वर्ष की बच्ची के पिता ने ही महज कुछ रुपयों के लिए उसे और उसके भाई को एक महिला के हाथों बेच दिया। वह महिला उसे दिल्ली ले आई और फिर उस पर जमकर अत्याचार किया गया। आखिरकार तंग आकर बच्ची वहां से भाग गई और फिर एक पार्क कर्मचारी की मदद से एक एनजीओ के पास पहुंच गई।
अपना दुखड़ा सुनाते हुए बच्ची कहती हैं कि मेरे पापा को शराब की लत थी। जब भी वह नशा करते थे तो हमें मारते-पीटते थे। कभी अच्छे कपड़े नहीं दिलाते थे। उसने बताया कि तीन महीने पहले पापा ने छह हजार रुपए के लिए एक आंटी के हाथों मुझे और मेरे भाई को बेच दिया।
आंटी ने अच्छा खाना, कपड़ा और मोबाइल दिलाने की वादा किया था, लेकिन दिल्ली लाकर मुझे एक कोठी में काम पर लगा दिया। अब तो भाई का पता ही नहीं है।
उसने आगे बताया कि कुछ दिन के बाद से ही आंटी और उनका बेटा डंडे व बेल्ट से उसकी पिटाई करते थे। रूंधे स्वर में वह कहती है कि मुझे कुछ बोलने नहीं दिया जाता था और कहा जाता था कि यहां हंसना गुनाह है।
रोहिणी सेक्टर 18 के एक पार्क से संपूर्णा एनजीओ की प्रतिनिधि तरुणा कटारिया को मिली इस बच्ची ने बताया कि वह रांची के पुंदाग नामक गांव में रहती थी। उसके चार भाई-बहन थे।
रोज-रोज की मारपीट से परेशान होकर आखिरकार उसने मंगलवार को वहां भागने का निर्णय ले लिया। शाम करीब 4 बजे वह घर के बाहर सीढ़ियों में पोंछा लगाने निकली थी और मौका देखकर वहां से भाग गई।
छिपने के लिए पास ही स्थित एक पार्क में चली गई। कड़ाके की ठंड में पार्क के गेट पर बनी सीढ़ियों के नीचे पूरी रात छिपी रही। इसके बाद, बुधवार की सुबह पार्क में सफाई करने पहुंचे एक कर्मचारी ने बच्ची को देखकर तरुणा को फोन किया। फिर, शाम को बच्ची को बाल कल्याण समिति में पेश कर दिया गया।
फलक मामले पर गृहमंत्री से मिलीं मुख्यमंत्रीशीला दीक्षित
गृह मंत्रालय द्वारा पुलिस से रिपोर्ट मांगे जाने के बाद बुधवार को दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने गृहमंत्री पी चिदंबरम से मुलाकात की और उन्हें जानकारी दी।
मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि एम्स ट्रॉमा सेंटर में भर्ती बच्ची फलक के मामले में पुलिस बेहतर तरीके से जांच करेगी और दो साल की इस बच्ची की मौजूदा हालत के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
इस काम में दिल्ली पुलिस को बाहर की पुलिस की भी मदद मिलेगी। जब मुख्यमंत्री से पूछा गया कि क्या वह मानती हैं कि फलक का मामला मानव तस्करी से जुड़ा है तो उन्होंने कहा कि यह काफी दुखद घटना है और उम्मीद है कि बच्ची को बचा लिया जाएगा।.
बच्ची के चेस्ट इंफेक्शन में सुधार
बीते कुछ हफ्तों से मौत से जूझ रही फलक की हालत में और सुधार हुआ है। डॉक्टरों के मुताबिक उसके चेस्ट इंफेक्शन में तेजी से सुधार हो रहा है। फलक को बीते कई दिनों से एंटीबायोटिक दी जा रही है, जो अब असर दिखाने लगी है।
हालांकि, ब्रेन इंफेक्शन अभी भी बरकरार है। एम्स ट्रॉमा सेंटर के न्यूरोसर्जन डॉ. दीपक अग्रवाल के मुताबिक फलक को ताउम्र जटिलताएं रह सकती हैं। बुधवार को एक बार फिर फलक को वेंटिलेटर सपोर्ट देना पड़ा। गौरतलब है कि बीते 18 जनवरी को फलक को जख्मी हालत में भर्ती किया गया था।
टीवी सिर्फ बिगाड़ ही नहीं रहे हैं, मरने पर भी कर रहे हैं मजबूर!