एफडीआई लागू करने से पीछे हटना नामुमकिन

नई दिल्ली. दिल्ली सरकार एफडीआई को लागू करने की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए भले ही विधानसभा के शीतकालीन सत्र में एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस मार्केट कमेटी (एपीएमसी) एक्ट में संशोधन का बिल नहीं ला पाई है पर मंगलवार को सरकार ने इस पर अपनी प्रतिबद्धता एक बार फिर दोहराई।
विधानसभा में अल्पकालिक चर्चा के जवाब में दिल्ली के विकास मंत्री राजकुमार चौहान ने कहा कि एफडीआई लागू करने के इरादे से पीछे हटना नामुमकिन है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने इस संबंध में समुचित निर्देश दिए हैं और समुचित प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। यदि जरूरी हुआ तो एपीएमसी एक्ट में संशोधन किया जा सकता है। मुख्यमंत्री के संसदीय सचिव मुकेश शर्मा ने कहा कि भाजपा अपने दकियानूसी विचारों के चलते हमेशा नई प्रगतिशील पहल का विरोध करती है।
भाजपा जनता के सामने गलत तथ्य पे शकर उन्हें भरमा रही है। उन्होंने कहा कि एफडीआई लागू होने से रोजगार बढ़ेंगे और उपभोक्ताओं को फायदा होगा। एफडीआई से अगले पांच वर्ष में देश में 25 अरब डॉलर का निवेश होगा। चीन से व्यापारिक खतरे का मुकाबला करने के लिए एफडीआई जरूरी है।
अल्पकालिक चर्चा की शुरुआत करते हुए विपक्ष के नेता प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा ने कहा कि 2002 में यही कांग्रेस संसद में रिटेल में एफडीआई की अनुमति के मामले को राष्ट्रविरोधी बता रही थी, आज क्या हो गया जो वही लोग इसे लागू करने पर आमादा हैं। उन्होंने कहा कि वॉलमार्ट कह रहा है कि उसने इंडिया, चीन व ब्राजील में लॉबिंग पर 125 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। आखिर वॉलमार्ट ये पैसा किसे देगा?
जो फैसला करने में सक्षम हैं। इसलिए कांग्रेस संदेह के घेरे में है। मल्होत्रा ने कहा कि दरअसल सरकार को लॉबिंग पर करोड़ों खर्च करने का दावा करने वाली कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर उससे उन लोगों के नाम पूछने चाहिए जिसे उसने पैसे दिए हैं।
भाजपा के रविंद्र बंसल ने दैनिक भास्कर की खबर का उल्लेख करते कहा कि कंपनियां करार में तय कीमत भी किसानों को नहीं देती हैं। जगदीश मुखी ने कहा कि एफडीआई अमेरिका की बेरोजगारी व आर्थिक तंगी को कम करने के लिए लाया जा रहा है।







