नई दिल्ली. सोमवार को दिल्ली की एक अदालत ने साफ कर दिया कि पत्नी के साथ जबरदस्ती सेक्स करना रेप नहीं माना जाएगा। कोर्ट ने कहा कि आईपीसी में वैवाहिक बलात्कार जैसा कोई मामला नहीं होता है। यदि शादी कानूनन सही है तो पत्नी से सेक्स (भले ही जबरन किया गया हो) रेप जैसा मामला नहीं है। पत्नी से रेप के आरोप में एक आरोपी को अदालत ने यह दलील देते हुए बरी कर दिया।
डिस्ट्रिक्ट जज जे.आर.आर्यन ने हाजी अहमद सईद के वकील की इन दलीलों से सहमति जता कर उसे आरोप मुक्त किया कि आईपीसी में 'वैवाहिक बलात्कार' जैसी कोई बात नहीं है।
अदालत ने कहा,'बचाव पक्ष के वकील ने बिल्कुल सही तर्क दिया कि आईपीसी की धारा में 'वैवाहिक बलात्कार' जैसा कोई मामला नहीं है। यदि शिकायतकर्ता कानूनी तौर पर आरोपी से ब्याही गई है तो आरोपी और उसके बीच सेक्स रेप नहीं कहलाएगा।' अदालत ने इस मामले को एक मजिस्ट्रेट अदालत के पास भेज दिया, ताकि बाकी के आरोपों की सुनवाई की जा सके।
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