नई दिल्ली. फलक की मां और उसे अस्पताल पहुंचाने वाली 14 वर्षीय किशोरी को बेचने वाले गिरोह की सरगना न तो लक्ष्मी है और न ही आरती। महिलाओं को बेचने वाले गिरोह का सरगना कोई और है, जो अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर है।
यह खुलासा पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा बुधवार को गिरफ्तार किए गए राहुल और राणा नामक आरोपियों ने किया है। उन्होंने पुलिस को असली मास्टर माइंड का नाम बता दिया है। अब पुलिस दावा कर रही है कि जल्दी ही मास्टर माइंड व गिरोह के फरार सदस्य भी उसके शिकंजे में होंगे।
पुलिस ने जब मुन्नी को बेचने वाली लक्ष्मी और किशोरी को बेचने वाली आरती को गिरफ्तार किया था तो यही माना जा रहा था कि इस गिरोह का संचालन ये दोनों महिलाएं ही कर रही हैं, पर आरती के पति राणा कुमार गुप्ता व बिहार निवासी राहुल ने खुलासा किया है कि इस पूरे गिरोह का मास्टर माइंड कोई और है।
पुलिस को राणा ने यह भी बताया है कि वह आरती का दूसरा पति है। फलक को एम्स ट्रॉमा सेंटर में पहुंचाने वाली नाबालिग जब अपने पिता के घर से भागी थी तो सबसे पहले आरती को ही मिली थी।
फिर आरती ने ही उसे पूजा व उसके पति संदीप पांडेय के हवाले कर दिया था, जिसके बाद वह राजकुमार के पास पहुंची थी, जो मुन्नी की दो वर्षीय बच्ची फलक को उसके पास छोड़कर भाग गया था।
साउथ-ईस्ट जिले के एडिशनल पुलिस कमिश्नर अजय चौधरी का कहना है कि राहुल उर्फ सल्लाउद्दीन बिहार का निवासी है और वह भी इस गिरोह से जुड़ा हुआ है।
राहुल व राणा ने गिरोह से जुड़े अनेक लोगों के नाम बताएं हैं, जिसमें गिरोह के मास्टर माइंड का नाम भी शामिल है। पुलिस की अनेक टीमें इस काम में लगी हुई हैं, जल्दी ही फरार लोगों को शिकंजे में ले लिया जाएगा।
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