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गीतिका केस: ‘जो बोले सो निहाल’ की आइटम गर्ल से भी होगी पूछताछ

Bhaskar News Network | Aug 22, 2012, 00:53AM IST
 
 


नई दिल्ली। गीतिका आत्महत्या मामले में मुख्यारोपी हरियाणा के पूर्व मंत्री गोपाल गोयल कांडा  पर अब आईटी (इंफॉरमेशन टेक्नोलॉजी) एक्ट के तहत भी मुकदमा दर्ज किया गया है।
 
इससे पहले पुलिस उस पर आईपीसी की धारा 306(आत्महत्या के लिए उकसाना), 506(धमकी देना) और 120 बी (आपराधिक षड्यंत्र रचना) की धारा के तहत मुकदमा दर्ज कर चुकी है।
 
दिल्ली पुलिस के विशेष आयुक्त (लॉ एंड आर्डर) धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि अब तक हुई तफ्तीश में यह साफ हुआ है कि उसने फरार रहने के दौरान इलेक्ट्रॉनिक सबूत जैसे हार्ड डिस्क, ई-मेल, एसएमएस आदि दस्तावेजों को नष्ट करने का प्रयास किया है।
 
इसे देखते हुए अब उसके खिलाफ आईटी एक्ट के तहत भी मुकदमा दर्ज किया जा रहा है। यह पूछे जाने पर कि क्या ये सबूत अब नष्ट हो चुके हैं उनका कहना था कि हमारे पर पर्याप्त सबूत हैं जिससे हम कांडा को दोषी साबित कर देंगे। हार्डडिस्क की फिलहाल एक्सपर्ट द्वारा जांच की जा रही है।
 
अभियोजन पक्ष की दलील
 
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि अरुणा ने गिरफ्तारी के बाद पुलिस को बताया था कि गीतिका की ज्वाइनिंग के महज एक माह पहले 2006 में एमडीएलआर एयरलाइंस में उसकी नियुक्ति हुई थी।
 
वहीं, कांडा की गिरफ्तारी के बाद बरामद की गई हार्ड डिस्क से मिले दस्तावेजों से इस बात की पुष्टि होती है कि अरुणा ने 50 हजार रुपए की तनख्वाह पर 2004 में बतौर महाप्रबंधक (समन्वय) एमडीएलआर एयरलाइंस में ज्वाइन किया था। अरुणा के ज्वाइनिंग लेटर पर एमडीएलआर में कार्यरत खुशबू शर्मा के हस्ताक्षर दर्ज हैं।
 
अभियोजन पक्ष ने बताया कि पुलिस पूछताछ में एमडीएलआर कंपनी में असिस्टेंट ह्यूमन रिसोर्स मैनेजर के पद पर कार्यरत शिवरूप ने बताया था कि उसने ही अलबशीर एट याहू डाट कॉम नाम से फर्जी ई-मेल आईडी बनाई थी। इसी ई-मेल आईडी से उसने अरुणा द्वारा ड्राफ्ट एक ई-मेल गीतिका को भेजा था। इस ई-मेल में उसके वित्तीय बकाए का उल्लेख किया गया था।
 
इसके अतिरिक्त, अभियोजन पक्ष ने बताया कि अरुणा अपने पिता के साथ मिलकर अरोमा फूड्स नामक एक कंपनी चलाती थीं। इस कंपनी का नाम मार्च 2012 में बदलकर एकेजी रख दिया गया। एकेजी का मतलब अरुणा, खुशबू और गीतिका था।
 
बचाव पक्ष का बयान
 
वहीं, बचाव पक्ष ने अभियोजन पक्ष की दलीलों पर आपत्ति जाहिर करते हुए कहा कि अरुणा की ज्वाइनिंग की तिथि का इस केस से कोई खास संबंध नहीं है। अरुणा अपनी कंपनी में कोऑर्डिनेटर के पद पर कार्यरत थी। उसका उच्च प्रबंधन द्वारा लिए गए निर्णयों में कोई हस्तक्षेप नहीं होता था।
 
अरुणा सिर्फ संदेशों के आदान-प्रदान और समन्वय का कार्य देखती थी। अरोमा फूड्स का नाम बदलकर एकेजी करने का कोई कांडा से कोई संबंध नहीं है। यह कंपनी तीन महिलाओं की आपसी सहमति से तैयार की गई थी। घटना से ढाई महीने पहले एमडीएलआर एयरलाइंस की ओर से गीतिका को एमबीए की बढ़ाई के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की गई थी।
 
इस वित्तीय सहायता में किसी भी तरह का अनुबंध नहीं था, जिसमें वित्तीय सहायता के बदले कंपनी ज्वाइन करने की शर्त रखी गई हो। बचाव पक्ष ने कहा कि पुलिस उन्हीं बातों का उल्लेख कर रही है, जिनका जिक्र मामले की सुनवाई के पहले दिन हो चुका है।
 
बचाव पक्ष ने उच्च न्यायालय के कुछ फैसलों को आधार बनाते हुए कहा कि अदालत द्वारा खारिज की गई पुलिस कस्टडी की याचिका को तब तक स्वीकार नहीं किया जा सकता है, जब तक नई याचिका में किसी नए तथ्य और पुख्ता सबूतों का उल्लेख न किया गया हो।
 
(फोटो: नुपूर मेहता)
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